आजकल

आज कल के बच्चे औऱ युवकों अपने सेहत के बारे मेंं लापरवाही रहते हैं। मुझे इस बात पर बडी ही परेशानी होती है। उनकी दैनिक ठीक तरह से नहीं चलती। मन चाहे करते हैं। किसी को भी देखो सिर्फ मोबाइल फोन में सदा के लिए मग्न रहते। खाना भी पीट्जा, बर्गर जैसा। घर में किसी के साथ बात करने का फुरसत है कहाँ, उनके पास। दिन मेंं 12 बजे के बाद ही उनके लिए सूर

ज निकलता है। रात कब घर लौटते कोई न जानें।उनके सुविधाओं में तनिक भी कमी नहीं होती। फिर भी इस जमाने के बच्चे ऐसे क्यों हैं, यह बात मुझे नहीं सूझती।

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