मनोभाव

तुम जो भी हो, जितने भी अनुभवशाली हो, होशियार भी क्यों न हो, किन्तु दूसरों को भी अपने तरफ़ की बात बताने का मौका दो।

सिर्फ नजरअंदाज का फैसला मत करो। क्योंकि शायद तेरी इरादा गलत भी हो सकें।

किसी पर भी उन्हें समझने से पहले अनुमान लगाने का जल्द बाज मत करो।

जो तेरे लिए कुछ खरीदना चाहता है इसका मतलब यह नहीं कि वो अपना हैसियत दिखाना चाहता है, वो तेरी दोस्ती का सम्मान करने में उत्सुक है ।

किसी भी तरह की कार्य करने में यदि कोई पहली कदम उठाया तो वह उसकी मूर्खता नहीं बल्कि वह अपनी जिम्मेदारी निभाना चाहता है कि क्यों कि उसे इस विषय का ज्ञान है।

एक लंबी बहस या लडाई जो भी हो, जब पहले इस पर कोई माफी माँगे तो इसका कारण यह नहीं कि वह गलत है, क्योंकि कि वह लोगों का मूल्य जानता है।

जो अक्सर तुझे संदेश भेजता या फोन करता तो इसका कारण यह नहीं कि वह बेकार है, वह सदा तेरी संपर्क में रहना चाहता है।

दिन, महीने, वर्ष सब कालचक्र में गुजरते जाएँं लोग एक दूसरे से अलग हो जाएँ सालों बाद जब हमारे पोते तस्वीरों को दिखाकर पूछें कि यह कौन है? तब हमारी आँखों के कोने से आँसू थोड़ा सा बाहर निकले बीती घटनाओं का याद दिलाए और बोले कि यह मेरे जीवन में एक प्रमुख व्यक्ति है।

दोस्तों को सममान करने की कोशिश में। 🙋👆👑

One thought on “मनोभाव”

  1. मेरे ब्लॉग्स पढकर “लैक्स” देनेवालों को मेरी तरफ से ढेर सारे धन्यवाद।
    आप लोगों का सहारा से ही मुझे इतने सालों बाद लिखने की आशा बढ रही है।
    फिर एक बार बहुत बहुत शुक्रिया।🙏

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