आर्जित सेवा। 🙏

तिरुपति के बालाजी के मंदिर में हर दिन प्रातःकाल से रात तक की कय तरह की सेवाएँ की जाती हैं। लेकिन इनमें से खास कर “अष्टदल पाद पद्माराधना” प्रमुख है।

आँध्रप्रदेश के गुन्टूर नगर से शेक मस्तान नामक एक मुसलमान पादयात्रा करके तिरुपति पहूँचा। वहाँ उसने अर्चकों से एक खास विनती की। अर्चकों ने उसे देवस्थान के इ.ओ. के पास ले गए।

शेक मस्तान उनसे कहा कि, अपने घर के वंशज कयी सालों से बालाजी के भक्त हैं। दादाजी के समय से उन्होंने भगवान को समर्पण करने के लिए स्वर्ण कमलों का संग्रहण करना शुरू की। हर एक कमल का वजन 24ग्राम का है। और अपने घर में बालाजी के तस्वीर के सामने प्रति दिन वेंकटेश्वर सुप्रभातम्, मंगलाशासनम् गाया जाता है।

अबकी बात यह है कि, दादाजी के काल से शुरू हुई 108 स्वर्णकमलों का संग्रहण अभी अपने काल में ही पूरी हुई है। इसलिए उसने इ.ओ. से इन स्वर्णकमलों को स्वीकार करके अपने परिवार की इच्छा को पूरा करने की विनती की। इस बात पर वहाँ मौजूद हुए सबके दिलों में आश्चर्य के साथ रोमांचक भावभी फूल उठी।

तुरंत इ.ओ. ने अपने कुर्सी से उठकर मस्तान से दोनों हाथ मिलाकर उसकी आशा को पूरी करने में अपनी तरफ से कृतज्ञता के साथ पूरी सहमति दी।

आजतक हर मंगलवार बालाजी को शेक मस्तान के परिवार द्वारा दी गई स्वर्णकमलों से आराधना की जा रही है।

धर्मों को पारकर भक्ति का एक बेहतर मिसाल है यह संघटन। 🙏👑

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