दृढ़ विश्वास

एक मंदिर के प्राकार में एक पंडित जी भगवतगीता का उपदेश कर रहे थे। नगर के ढेर सारे लोग इकट्ठे हुए थे,क्योंकि पंडितजी के प्रवचन दिल को लुभाती है। उसी वक्त वहाँ एक चोर चोरी करने के लिए आसपास के घरों पर नजर लगाते हुए टहल रहा था। वहाँ मंदिर में इकट्ठे हुए भीड़ को देखकर वह भी उन लोगों के साथ प्रवचन सुनने लगा। तब पंडितजी श्रीकृष्ण के बचपन का वर्णन कर रहे थे। वर्णन में श्रीकृष्ण के और माता यशोदा के गहनों का वर्णन ऐसे किए कि इस चोर को मन में ऐसा लगा कि छोटी-मोटी चोरी के बदले में यदि वह श्रीकृष्ण और यशोदा माता पहने हुए गहनों को लूट लिया तो अपना जीवन भर के लिए निशचिंत रह सकेगा।

कुछ देर बाद वह धीरे धीरे पंडितजी के पास जाकर श्रीकृष्ण के वासस्थल के बारे में पूछा जिसका पता यह चला कि श्रीकृष्ण बृंदावन में रहते हैं।वह चोर अनपढ़ था और किसी भी धर्म के बारे में रीति रिवाजों के बारे में कुछ भी नहीं जानता था।

चोर बृंदावन की ओर चलने लगा। और बृंदावन पहूँच भी गया। वहाँ संध्या छाने लगी। चोर एक पेड़ पर छडकर बैठ गया। उसका मन श्रीकृष्ण के बारे में ही सोच रही थी। पंडितजी द्वारा वर्णित श्रीकृष्ण को उसके नजरें ढूंढने लगे।

तभी वहाँ दो छोटे बालक जाते हुए नजर आए। तुरंत चोर उन दोनों के सामने कूद पडा और अपने साथ रखे हुए छूरी से उन्हें धमकाते हुए सारे गहनों को अपने हवाले करने के लिए कहा। दोनों श्रीकृष्ण और बलराम थे। देखने में पंडितजी ने कैसे वर्णन किए थे बिलकुल वैसे ही थे। दोनों बालकों ने चोर से पूछे कि उसे इन दोनों के बारे में किसने बताया तब चोर उन्हें पंडितजी के बारे में जानकारी दी।

दोनों बालक चोर के साथ पंडितजी से मिलने के लिए उस चोर के नगर आ पहूँचे और पंडितजी से चोर धन्यवाद देते हुए बोले कि उस पंडितजी के कारण ही अब उसे जिंदगी भर चैन से जीने के लिए काफी दौलत भी मिल गई। पंडितजी चौंककर उससे सारे वृत्तांत की जानकारी ली। तब चोर पंडितजी से दोनों बालक अपने साथ पंडितजी को देखने को के लिए साथ होने की बात भी कहा। लेकिन पंडितजी श्रीकृष्ण को नहीं देख सके।गदगद होकर मंदिर में मौजूद श्रीकृष्ण के मूर्ति के पास जाकर अपने को किस लिए दर्शन न देने की प्रश्न की।

श्रीकृष्ण की मूर्ति से आवाज निकली चोर अपने को सच में रहने की दृढ़ विश्वास से खोजने के कारण उसे दर्शन दिया। लेकिन पंडितजी तो सिर्फ भगवतगीता का वर्णन ही किए हैं। जो भी अपने को सचमुच मानता है उसे उसी रूप में दर्शन मिलता है।

12 thoughts on “दृढ़ विश्वास”

  1. Poori kahani me pandit aur chor dono he hyper active hai.
    Pandit ki aawaz se chor par jaadu hua, chor bhi good listening skills wala tha, single shot me retirement plan bna liya…

    No doubt itni bhakti aur fan foll9wing dekh, Bhagwan ne ek air ‘leela’ create ki hogi.

    Very nice post
    ⭐⭐⭐⭐⭐

    Liked by 1 person

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