वल्ललार्(ज्ञानी)

उनके प्रवचनों से

* भूखे रहो। भगवान की कृपा पाने के लिए भूखे रहना।

* अलग रहो।। अकेलेपन में अपने मन की शांति को ढूंढना।

* जागे रहो।। भगवान के दया को प्राप्त करने के लिए जागे रहना।

* सबके दिलों में भगवान के दर्शन करना ही सच्ची भक्ति माना जाता है।

* प्यार, ज्ञान और भक्ति जिसके पास मौजूद है, वह ही अपने आप उन्नति प्राप्त करता है।

* उत्तम मानव के दिल में ईश्वर प्रणव ज्योति के रूप में बसता है।

* सबको त्याग किए हुए मनुष्य ईश्वर का स्वरूप माना जाता है। इसलिए उसे अपने कल्पना में सीमित करना असंभव है।

* सुख दुःख का अनुभव इस भौतिक शरीर द्वारा आत्मा महसूस करती है।

* सब कुछ ईश्वर का चमत्कार मानें तो किसी भी तरह की परेशानी नहीं होगी।

* योगध्यान द्वारा ही हम ईश्वर को जान सकते हैं। अतः ध्यान करना दैनिक जीवन का अनिवार्य अंग होना चाहिए।

* मानव जीवन में परोपकार द्वारा ही सार्थकता मिलता है।

* कपटी लोगों से सदा के लिए दूर रहना चाहिए।

* हर एक मनुष्य को किसी एक दिन इस शरीर को त्याग करके जाना पड़ता है तो किस लिए इस प्रकार के जाति, धर्म, आर्थिक स्थिति में भेद भाव??

* घमंडी रूपी भूत दीमाग में चढ गई तो दिल में उपस्थित ईश्वर रूपी बुद्धि को नहीं पहचान सकते।

* मित्रों के साथ कभी भी कपट दिल से व्यवहार नहीं करना चाहिए।

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अरुलप्रकाशं वल्ललार् चिदंबरम् रामलिंगम् , का जन्म 5,अक्टूबर, 1823 में चिदंबरम में हुआ। वे तमिलनाडु में ज्ञानी के रूप में सबसे माने गए हैं। वे ईश्वर को ज्योति के रूप में महसूस किए हैं। आज भी कई लोग उनके द्वारा निर्धारित राह को अपने जीवन में अनुकरण कर रहे हैं।उनके गायन तिरुअरूलपा नाम से प्रसिद्ध है।

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