आप आप ही रहिए।

आप जैसे रहना चाहते हैं, वैसे ही रहिए। औरों को देखकर उनके तरह रहने की कोशिश कभी मत कीजिए। इससे अपने अस्तित्व को खो बैठते हैं।ढेर सारे विषयों को मन में सोचतेहुए अपने आप को परेशान मत कीजिए। औरों से तुलना करके अपने चैन को मत खो बैठिए।

दो अलग अलग गुरूओं के शिष्य मिलकर आपस में बातचीत कर रहे थे। पहले शिष्य ने अपने गुरु की प्रशंसा करते हुए कहा, “मेरे गुरुजी नदी के ऊपर पैदल चलते हैं, हवा में उडकर ऊपर जा सकते हैं, आग में कुछ घंटों तक बैठ सकते हैं। क्या! तुम्हारे गुरुजी ऐसे रोमांचक चमत्कार करके दिखाते हैं?”

दूसरे चेले ने कहा, “मेरे गुरुजी तो नदी के पानी में नहाते हैं, हवा में से श्वास लेते हैं, आग से खाना पकाते हैं।” उनका कहना है, किसी भी तरह के चमत्कार किए बिना साधारण जीवन बिताना ही बेहतर होगा। औरों को खुश रखने की कोशिश में आप अपने जिंदगी के खुशियों को कभी मत खोना चाहिए। अपने जिंदगी अपने लिए जियो।

वर्तमान की छोटी छोटी खुशियों को नामुमकिन सी काल्पनिक सपनों के कारण बरबाद मत कीजिए। अपने इस छोटी सी जिंदगी को पूरी तरह से जिएँ।

3 thoughts on “आप आप ही रहिए।”

  1. वर्तमान की छोटी छोटी खुशियों को नामुमकिन सी काल्पनिक सपनों के कारण बरबाद मत कीजिए। अपने इस छोटी सी जिंदगी को पूरी तरह से जिएँ।

    bahut pyara message …. 🙂

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