स्वार्थ तथा परोपकार

आजकल के ज्यादातर लोगों में स्वार्थता बहुत ही बढ ग ई है। दूसरों को मदद करने के लिए जितना भी मौका क्यों न हो, इस में इनका सोच” अपने को क्या फायदा मिलें!” जैसे ही होती है।

एक समय एक लडके को कडी बुखार हुई।वह बिस्तर से उठ नहीं पा रहा था। डाक्टर को बुलवाए। डाक्टर इस लडके को जांच किया और कहा कि , इसको रोग फैलाने वाले कीटाणू के कारण यह बुखार हुई है और इस कारण उसे बाहर कहीं नहीं जाना चाहिए। हर दिन डाक्टर उनके घर जाकर इलाज किया। दवाइयाँ, गोलियाँ और इनजेक्शन भी लगाया। एक हफ्ते के बाद लडका ठीक हो गया। डाक्टर ने इतने दिनों के इलाज की बिल दिया। इसे देखकर बेटे का बाप ने चिल्लाने लगा और कहा, ” मैं क्यों आपको पैसे दूँ?” डाक्टर धीरे से कहा, ” मैं एक हफ्ते तक आपके घर आकर इलाज किया हूँ। दवाइयाँ, गोलियाँ और इन्जेक्शन भी लगाया हूँ। इसलिए !”

इसपर लडके के बाप ने कहा, “मेरे बेटे की वजह से ही बीमार फैली है और आपके यहाँ इलाज के लिए ढेर सारे लोग आ रहे हैं, जिससे आपके आमदनी बढेगी। सच कहूँ तो आपको ही को मुझे पैसे देना चाहिए। ”

इस तरह लोगों में हरेक विषय पर सिर्फ और सिर्फ अपने स्वार्थता की चिंतना ही बढ रही है। जीहाँ दोस्तो, परोपकारता बांसुरी जैस होताा है और स्वार्थ फुटबाल जैसा। दोनों हवा से चलता है। एक को तो चूमा जाता है और दूसरे को धक्का मारा जाता है।

बांसुरी हवा को बाहर भेजकर सुंदर संगीत से सबको सम्मोहित करती है, जहाँ कि फुटबाल हवा को अपने अदर रखकर सबसे धक्का खाती है।

बांसुरी जैसा परोपकारी सबका पसंदित होता है, फुटबाल जैसा स्वार्थी सबसे तिरस्कृत किया जाता है।🌹

3 thoughts on “स्वार्थ तथा परोपकार”

  1. bahut badhiya ma 😀

    सुर नर मुनि सब की यह रीति
    स्वारथ लागि करहिं सब प्रीति

    अर्थात देवता,मनुष्य,और मुनि सबकी यह रीति है कि स्वार्थ के लिए ही सब प्रीति करते हैं।

    ~ रामचरितमानस

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  2. सुन्दर उपदेशक कथा | 
    यदि बाँसुरी के उदाहरण की बात आगे करें तो यह भी कहना होगा कि  एक बार मात्र हवा के उपयोग से बांसुरी नहीं बजेगी , हवा का सत्ता बहाव जरूरी है , परोपकार का प्रयास भी निरंतर हो | 

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