कालडी

जय जय शंकर। हर हर शंकर।🙏🙏

पूज्य श्री शंकराचार्य श्री चंद्रशेखर सरस्वती स्वामी जी से मिलने के लिए एक भूवैज्ञानिक आए थे। स्वामी जी उनसे केरला में बहनेवाली पेरियार ( पूर्णानदी) से बालू वैसे ही कालडी की तरफ यू टर्न लेकर प्रवाह होने की जगह से बालू को लेकर अलग अलग शोधन करके उन दोनों के काल समय की जानकारी देने की आग्रह किए।

पेरियार नदी का आयु 10,000 साल पुरानी की थी, लेकिन वह नदी जहाँ यूटर्न लेकर आदि शंकराचार्य के घर तक बहती है, जो अब भी कालडी में उपलब्ध है, वहाँ की रेत की आयु 2,500 वर्ष पुरानी थी।

आदि शंकराचार्य स्वामी जी की माता प्रतिदिन सुबह उठकर पूर्णानदी तक पैदल चलकर स्नान करती थी। लेकिन बुढापे के कारण वहाँ तक प्रतिदिन जाना उन्हें मुश्किल लग रहा था। शंकराचार्य जी के मना करने पर भी वे उनकी बात न मानी और परिश्रम से नदी तक जा रही थी। शंकराचार्य स्वामी ने नदी माता से अपनी माँ के लिए अपने घर तक बहने की प्रार्थना की। और अगले दिन से पूर्णानदी अपनी सहज गति से मुडकर शंकराचार्य स्वामी के घर तक बहना शुरू की। अब भी हमें इसे देखने को मिलता है।

कालडी का मतलब है, तमिल भाषा में पैरों के नीचे। माने पूर्णानदी आचार्य जी के माता की सुविधा के लिए उनके पैरों तक बहने के कारण से यह कालडी नामकरण सिद्ध हुई।

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