निंदा की असर

एक जंगल में एक ऋषि तपस्या कर रहे थे। वे तपस्या के बीच में ही अपने आँखों को बिना खोले, हाथ बढाते थे, आस पास के गांव से जो लोग उन्हें दर्शन करने आते थे, वे उनके हाथ में फलों को काटकर रखते थे। ऋषि इन्हें खाते थे। लोगों का विश्वास था कि ऋषि को खिलाने से उनके जीवन के कष्ट दूर हो जाएगा।

एक दिन उस राज्य का राजा शिकार करने के लिए जंगल आया था। उसने ऋषि को देखा। लेकिन उस समय जंगल में राजा और ऋषि के अलावा कोई नहीं था। तभी ऋषि ने अपना हाथ बढाया। राजा ने मजाके में अपने घोड़े का गोबर थोड़ा सा लेकर ऋषि के हाथ में रख दिया। ऋषि ने भी अपने आँखों को खोले बिना गोबर को अपने मुँह में डाल दिया। इसे देखकर राजा ने जोर से हँसते हुए वहाँ से निकला।

अगले दिन राजा के दरबार में एक ज्ञानी पधारे और अपने दिव्य दृष्टि से राजा के पिछले दिन की व्यवहार की याद दिलाकर उन्हें चेतावनी देते हुए कहा कि, राजा के कुकर्म का नतीजा यह है कि, नरक में उसकी मृत्यु के बाद ऋषि के हाथ में जिस प्रकार के गोबर को रखा था, बिलकुल उसी प्रकार की गोबर की एक छोटी सी पहाड़ जैसी इकट्ठा हुई है, जिसे राजा को हर दिन खिलाया जाएगा।

इस बात पर राजा बहुत ही घबरा गए और अपने दुष्कर्म का प्रायश्चित के लिए राजगुरु के सलाह के अनुसार अपने महल के बगीचे में एक कुटीर बनाया। शानदार जीवन को छोड़कर उसी कुटीर में रहने लगा।राज्य के कन्याओं को वहाँ बुलाकर उन्हें नैतिकता का मूल्य समझाकर, उनके विवाह के लिए उचित धन, जेवर देकर उन्हें वापस भेज रहा था। लेकिन कुछ लोग राजा के इस व्यवहार को दोष देकर उन्हें बुरी तरह प्रचार करने लगे।

ऐसी हालत में एक बार एक गुणवती, अपने अपाहिज पति को लेकर भीख मांगने राजा के कुटीर के सामने आई। तभी उसकी पति ने इसे वहाँ खडे होने से मना करते हुए राजा की निंदा की। वह गुणवती पत्नी अपने पति के बातों पर खिन्न होकर उसे अपनी पतिव्रता शक्ति द्वारा सारे वृत्तांत को जानकर, उसे समझाई।

राजा अपने पाप का प्रायश्चित कर रहा है, जिसे कुछ लोग राजा को बुरी तरह से समझ कर प्रचार कर रहे हैं। इससे जो कोई भी राजा के अच्छे कामों को बुरी तरह दिखाने की कोशिश करें, उसे राजा के लिए नरक में इकट्ठा हुई गोबर का मुट्ठी भर का खाने के लिए दिया जाएगा। वैसे ही वहाँ इकट्ठा हुई पूरा गोबर अब तक खतम हो गई है।

गलत कामों पर पछताकर जो अपने को सुधार कर अच्छे कामों में लग जाय, उसे बुरी रंग चढाने वालों को इनके पाप का हिस्सा भुगतना पडता है।

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