हनुमानजी चिरंजीवी हुए। कैसे??

  भगवान इंद्र से लड़कर हनुमानजी बेहोश हो गए। इससे उनके पिताजी वायु दुखी हो कर उसे अपने गोद में लिए और अपने काम से विदा ले लिए।

इस कारण संसार के सभी जीव जंतुओं को सांस लेने में दिक्कत हो रही थी । इसमें देवताओं और गंधर्व भी शामिल थे। सभी मिलकर ब्रह्मा से इसकी सुझाव के लिए गए।

ब्रह्मा जी ने अपने हाथ से इस बालक को छुए और हनुमानजी उठकर बैठ गये। तभी ब्रह्मा ने सबको संबोधित करते हुए कहा कि “यही बालक भविष्य में तुम सभी को रावण जैसे राक्षसों से बचा सकता है इसलिए उसे अपने अपने ताक़त के वरदान प्रदान कीजिए।”

सूर्य भगवान ने अपने प्रकाश किरणों में से एक प्रतिशत हनुमानजी को दिए और इसके अलावा हनुमानजी को वेदशास्त्रों तथा अन्य सभी विद्या सिखाने को अपनी पूरी सम्मति दी।

वरूण भगवान ने, जल तथा वायु से हनुमानजी को किसी भी तरह की हानी न होने की वर प्रदान की। यम धर्म ने अपने दंडायुध या अन्य किसी तरह की बीमारी से पीड़ित न होने की वर दी। कुबेर ने हनुमानजी युद्ध भूमि में कभी भी थकान न होने की वर दी। भगवान शिव अपने अस्त्र तथा हाथों से हनुमानजी को कभी भी मृत्यु न होने की वचन दी। विश्वकर्मा ने अपने द्वारा किए गए शस्त्रों से हनुमानजी को कभी भी हानी न होने की वर दी। ब्रह्मा, “हनुमानजी चिरंजीवी रहेंगे और ब्राह्मणों से कभी भी उसे शाप न दी जायेगी। अपने इच्छित रूप ले सकेंगे और कहीं भी पलभर में पहुंच सकेंगे। सदा निर्भय रहेंगे और उसे असफलता कभी नहीं होगा।” जैसे वरों से वायु भगवान को शांत किए।

इन सभी बातों से संतुष्ट हो कर वायु भगवान अपने काम में जुट गए। जय श्री राम।🙏

2 thoughts on “हनुमानजी चिरंजीवी हुए। कैसे??”

Leave a Reply

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out /  Change )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out /  Change )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out /  Change )

Connecting to %s

%d bloggers like this: