रामायण

“रा” मानें उजाला, “मा” का मतलब है अपने ही अंदर। रामा का अर्थ है, अपने अंदर की रोशनी। राम के जननी, जनक हैं, कौशल्या और दशरथ। दशरथ का मतलब है , दस रथ। पांच ज्ञानेंद्रियों और पांच कर्मेंद्रियों को दस रथों से तुलना की गई है। कौशल्या मानें हमारे प्रवीण (कोशलता),। कौशल्य नामक सारथी दस इंद्रियों को अपने वश में लिए राम का जन्म दिए हैं। मानें जब दस रथों को कौशल्यता से प्रयोग किया जाता है,तब एक चमक उत्पन्न होती है।

राम का जन्म अयोध्या में हुआ। “अयोध्या”, का मतलब है, कभी भी युद्ध नहीं हो। मानें जब हमारे भीतर किसी भी तरह की झंझट न हो तो, सिर्फ चमक ही प्रकाशित होती है।

रामायण केवल एक पौराणिक इतिहास ही नहीं, बल्कि यह, आध्यात्मिकता, तत्वज्ञान तथा गहरासत्य के प्रतीक माना जाता है।

कहा जाता है कि रामायण हमारे अंदर ही चलता रहता है। हमारी आत्मा – राम, बुद्धि – सीता , श्वास – हनुमान (प्राण), जागरूकता – लक्ष्मण , और अभिमान ( घमंड)- रावण। जब बुद्धि (सीता) अभिमान (रावण) से चुराया जाता है, तब आत्मा (राम) , परेशान हो जाता है।

अब आत्मा (राम) , बुद्धि ( सीता) तक नहीं पहुंच सकती है। तो प्राण (हनुमान) और जागरूकता (लक्ष्मण) के सहारे से आत्मा (राम) , बुद्धि (सीता) से मेलन हो जाती है। और घमंड (रावण) का अंत हो जाता है।

असलीयत में रामायण एक अनंत घटना है, जो सदा ही हममें चलता रहता है। 🙏 जय श्री राम। 🙏

8 thoughts on “रामायण”

  1. अभी तक की मेरी सबसे अच्छी पोस्ट जो मैंने पढ़ा है। खुद में खुदा दिख गया तो समझो जीवन सफल हो गया। बहुत ही गुढ़ बात कभी है आण्टी आपने 🙏🤗

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