लघु कथा

गुरु श्री रामकृष्ण परमहंस अपने शिष्यों को गंगा नदी के किनारे उपदेश दे रहे थे। स्वामी विवेकानंद भी उनके साथ बैठे थे।

तभी अचानक कुत्तों के भौंकने के हलचल सुनाई पड़ी। एक कुत्ता वहां के कूड़ेदान से एक हड्डी अपने मुंह में दबाए तेज़ से दौड़ी। बाकी कुत्ते उसके पीछे भौंकते हुए भागने लगे।

गुरूजी अपने चेलों से इस दृश्य को देखकर अपने मन की बात कहने की आदेश दी। एक ने कहा कुत्ते का आदत दूसरों को दिए बिना खाना। दूसरे ने कहा, बलवान की जीत, तीसरे ने कहा, दुष्ट होने के नाते वह कुत्ता सबसे पहले किसी को छूने तक न देकर उस हड्डी को अपने कब्जे में ले लिया।

आखिर स्वामी विवेकानंद ने कहा, भगवान को जानने वाले उस कुत्ते जो चैन से हड्डी की स्वाद ले रही है, उसी तरह अपने मन में शांतिपूर्वक भगवान को महसूस करते हैं। भगवान को जो पहचान नहीं सकते वे भौंकने वाले कुत्तों की तरह बकवास करते रहते हैं।

जय श्री रामकृष्ण परमहंस, स्वामी विवेकानंद गुरु महाराज की। 🙏🙏

5 thoughts on “लघु कथा”

Leave a Reply

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out /  Change )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out /  Change )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out /  Change )

Connecting to %s

%d bloggers like this: