भगवान का हिसाब।

  एक मंदिर के आंगन में दो आदमी बैठकर  बातें कर रहे थे। खूब बारिश हो रहा था। और एक आदमी भी वहां आ पहुंचा। सबको भूख लग रहा था। पहले आदमी के पास ५ रोटियां थी। दूसरे के पास ३ रोटियां थी। तीसरे के पास खाने के लिए कुछ भी नहीं था। तब तीनों ने मिलकर हरेक रोटी को तीन-तीन टुकड़ों में करके हरेक आठ टुकड़े लेकर खाए। और वहीं सो गए।

    सुबह बारिश रुक गई। तीसरे आदमी ने इन दोनों को आठ मोहरे देकर आपस में बांटने को कहकर उनसे विदा लिया। दूसरे आदमी ने इन मोहरों में से अपने को चार मोहरे देने को कहा,क्योंकि, उसने अपने ३रोटियों को दे दिया था। लेकिन पहले ने नहीं माना और कहा, वह ५ रोटियां दिया था, इसलिए अपने को ५ और दूसरे को ३ मोहरें देने को माना। दोनों में समझौता नहीं हो रहा था। तब दोनों ने राजा के पास जाने के लिए तय किए।

    राजा ने पूरे घटना को सुना और अगले दिन अपनी फैसला सुनाने की हामी दी। रात राजा को नींद नहीं आ रहा था। राजा भगवान से अपने को मदद करने की प्रार्थना की। आधी रात को उसे भगवान ने अपनी फैसला सुनाया।

     दूसरे दिन सब लोग राजा के फैसला सुनने के लिए उत्सुक थे। राजा ने अपने मन में भगवान को धन्यवाद देते हुए फैसला सुनाया। दूसरा जो ३ रोटियां दिया था उसे सिर्फ एक मोहरा और पहला जो ५ रोटियां दिया था उसे ७ मोहरे देने की हुकुम दिया।

दूसरे आदमी को इस पर बहुत दु:ख हुआ। उसने राजा से कहा,” पहले आदमी ने मुझे तीन मोहरे देने को तैयार था। आप सिर्फ एक ही दे रहे हैं???” राजा ने उसे अपना हिसाब सुनाया। ” तुम अपने ३ रोटियों को ९ टुकड़ों में काटा और इनमें से ८ तुमने ही खा लिया। लेकिन पहले ने अपने १५ टुकड़ों में से ८ खाया और ७ बांटा। इसलिए तुम्हें १ मोहरा ही ज्यादा है।”

यही है भगवान का हिसाब जो अलग होता है। वही है धर्म का हिसाब। ✌️🙏

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6 thoughts on “भगवान का हिसाब।”

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