हर एक औरत केलिए

मदर तेरेसा की लेखनी से :

यदि हमारी आँखें सकारात्मक हो, तो हम इस दुनिया से प्यार करेंगी।

लेकिन यदि हमारी जुबान सकारात्मक हो, तो यह संसार हमें प्यार करेगी।

एक औरत अपनी प्यार को कार्यरूप देती है। वह दिल से देखती और आँखों से महसूस करती।

औरत अपनी परिवार केलिए एक बैंक जैसी होती है, जहाँ इसके सभ्य अपने अपने क्रोध, परेशानी, बाधा आदि को आसानी से डेपासिट कर सकते हैं।

औरत सिमेंट की तरह परिवार के लोगों को बाँधती है, जो कई सालों तक मजबूत रहती है।

आजकल

आज कल के बच्चे औऱ युवकों अपने सेहत के बारे मेंं लापरवाही रहते हैं। मुझे इस बात पर बडी ही परेशानी होती है। उनकी दैनिक ठीक तरह से नहीं चलती। मन चाहे करते हैं। किसी को भी देखो सिर्फ मोबाइल फोन में सदा के लिए मग्न रहते। खाना भी पीट्जा, बर्गर जैसा। घर में किसी के साथ बात करने का फुरसत है कहाँ, उनके पास। दिन मेंं 12 बजे के बाद ही उनके लिए सूर

ज निकलता है। रात कब घर लौटते कोई न जानें।उनके सुविधाओं में तनिक भी कमी नहीं होती। फिर भी इस जमाने के बच्चे ऐसे क्यों हैं, यह बात मुझे नहीं सूझती।

परिचय

नमस्ते! मैं पद्मजा, अपनी पहली ब्लॉगपोस्ट लिख रही हूँ। मैं चेन्नई मेंं रहने वाली गृहणी हूँ। बचपन से मुझे हिन्दी में बात करने की ज्यादा दिलचस्पी थी। इसलिए पहले हिन्दी प्रचार सभा की परीक्षाएँ लिखना शुरू की। सिर्फ इससे हिन्दी भाषा की परिचय तो हुई, लेकिन बात चीत न कर पाई।तभी से मैं अपनी बहन के साथ बात करना शुरू की। यदि हम कोई गलत करें तो हमारे पापा जो हिन्दी भाषा विशारद हैं, हमें ठीक कर देते हैं। आज कल तो मुझे इस बात पर आश्चर्य होता है कि मैं भी हिन्दी में बात कर सकती हूँ। अब

इसी तरीके से मैं अपनी पास हिन्दी सीखने वाली लडकियों को हिन्दी में आसानी से बात करने में मदद कर रही हूँ।