ऐसे भी कुछ रिश्तेदार!!

कुछ रिश्तेदार ऐसे भी होते हैं, जो हमसे खूब मदद लेते और हम पर ही जलते हैं। हर एक की जिंदगी अलग अलग होती है। जिंदगी तो सुख और दुःख दोनों का मेलन होती है। हर एक अपनी जीवन में अगले हिस्से में कई तरह के मुश्किलों का सामने करके जिंदगी को शांतिपूर्ण जिएगा तो लोग उसकी चैन से रहने को बरदाश नहीं कर पाते। उसे किसी भी तरह से निंदा करने के लिए तरसते हैं। यदि हम उनसे दूर रहने की कोशिश करें तो भी हमें नहीं छोडते। किसी भी तरह हमें ठेस पहूँचाने के लिए कुछ भी करने को तैयार रहते हैं। इससे उन्हें क्या मिलेगा? बल्कि यदि वे थोड़ा अपने जिंदगी के, परिवार के बारे में सोचकर उनकी भलाई के लिए कुछ करें तो कितना अच्छा होगा? ऐसे लोग कब बदलेंगे?

और एक बात “तुलना करना”। तुम्हारे पास यह है, हमारे पास नहीं। तुम्हारा परिवार हमारे परिवार से बेहतर है, भगवान क्यों हमें ही परेशानियाँ देता है। जैसा🙄

इन सब बातों से कुछ बदलाव आएगा क्या? उनके जीवन में।भगवान पर इलजाम डालने के बगैर ईश्वर से अपने को अच्छी राह दिखाने की प्रार्थना करें तो बेहतर होगा। सब को अपने अपने कर्मों का फल स्वयं भुगतना ही पडेगा। इस सच्चाई को जानते हुए भी वे अपने को बदलने केलिए तैयार नहीं होते।

असली आजादी

👑 फिडल केस्ट्रो क्यूबा देश के नेता

यहाँ सिर्फ सरकारी आस्पताल ही मौजूद हैं। व्यक्तिगत आसपतालों की बात तक नहीं होती।

स्कूल और कालेजों को भी सिर्फ सरकार ही चलाती। आसार्वजनिक विद्यालयों को चलाने का इजाजत नहीं है।

6 से 15 साल तक के बच्चों को पढाई जरूरी है। सब केलिए एक ही तरह की वर्दी। 12 विद्यार्थियों को एक टीचर। विकसित देशों में भी हम इस प्रथा को नहीं देख सकते। बिना शुल्क लिए शिक्षा प्रदान। पढाई 99.8% ।

कारखानों में 70% महिलाएँ काम करती हैं। उन्हें वेतन भी मर्द के बराबर ।

2006 में BBC ने वैद्य रंग में क्यूबा को दुनिया के सर्वश्रेष्ठ देश के रूप में घोषित किया है। प्रसूति के समय मरने वाली माताओं की संख्या यहाँ बहुत कम। HIV से पीड़ित लोगों की संख्या भी बहुत कम है।

2015 में 95% क्यूबा के वासियों को खुद का घर है। आज बिना घर का प्लेटफार्म वासी एक भी नहीं मिलता। घर के लिए टेक्स् नहीं और बैंक लोन पर ब्याज भी नहीं है।

👆 इन सब साधनाओं का कारण है एक उत्तम नेता

फिडल केस्ट्रो

हमारे देश की सरकार हम पर ढेर सारे कर लगाती फिर भी इससे आम जनता को क्या मिल रहा है?

जबतक सरकारी कर्मचारियों में और राजकीय नेताओं में फैली हुई भ्रष्टाचार नहीं हटती तबतक हम सबको क्यूबा देश जैसी हालत सिर्फ सपना ही रहेगा।

सीख

बच्चों में सामाजिक जिम्मेदारी बढाने के कुछ तरीक़े:

1. खैरात देने में पुराने चीजों के बदले जरुरतमंद बच्चों को वर्दी, पुस्तकें, खिलौने आदि खरीदकर देने का आदत बढाना।

2. बच्चों के बीच में हैसियत का अंतर नहीं होना। सबके साथ मिलकर खेलना, पढना, खाना इत्यादि।

3. हफ्ते के आखिरी दिन में (माल) लेकर जाने के बजाय, कुदरती जगह ले जाना।। क्योंकि आजकल के बच्चे मनुष्य और कुत्ते के अलावा किसी भी जीव जन्तु को नहीं जानते। हर एक जीवराशी एक दूसरे पर कैसे निर्भर रहता है, इसका जानकारी देना।

4. बचत की महत्व जरूर सिखाना, क्योंकि इस दुनिया में कोई भी चीज आसानी से नहीं मिलती। टूटी हुई चीज को छिपकाकर इस्तेमाल करना, फटी कपडे को सीना, नल रिपेर करना, पुनरावृत्ति का अहमियत आदि। पानी, पैसे, बिजली सबके उपयोग में ध्यान से करने की बोध।

5. सबके साथ आदर से व्यवहार करना। सब्जी वाले हो या नौकर हो या गरीब हो हर एक को इज्ज़त देना।

6. हर एक अच्छी काम का तारीफ करना। समाजिक भलाई करनेवालों की कहानियाँ सुनाकर उन पर इज्ज़त बढाना ताकि बच्चे भी उनकी तरह सामाजिक सेवा करने में दिलचस्पी लें।

7. किसी के बारे में भी बच्चों के सामने बुरा मत कहना। क्योंकि इनके दिलों में नफरत का भाव कभी नहीं आने दें।

8. रिश्तेदारों के साथ साथ हर एक समूह के लोगों के समारोह में बच्चों के साथ भाग लेना ताकि इनके दिल में सामूहिक भेद भाव न उठें।

9. हमारे खयाल जो भी हो लेकिन सच ही कहना।

10. हर रात सोते वक्त नैतिक कहानियाँ सुनाना।

पापा

आप लाखों में एक। आप जैसे इनसान को इस जमाने में देखना दुर्लभ है। आप मधुर भाषी , दयालु, मित्रवत साजन हैं। इसी कारण आपके विराम के इतने सालों के बाद भी लोग आप पर इतना इज्ज़त और प्यार रखें हैं।

आप काम करते वक्त कभी भी किसी भी तरह की पक्षपात नहीं दिखाए। आप सदा ही मामूली और सीधा सादा आदमी ही रहे। सदा सबका ध्यान रखते हैं। चपरासी के साथ भी कभी आप अपनी अधिकार नहीं दिखाए।आपके संस्था के शताब्दी आप ही के नेतृत्व में मनाया गया था, यह तो सचमुच सौभाग्य की बात है।

आप कभी भी किसी भी धर्म का द्वेष नहीं की। आपके नजरों में भगवान एक ही है। आपके इस महत्वपूर्ण गुण पर मुझे गर्व होती है।

आपकी सादगी और भोलेपन, भगवान पर भरोसा आदि विशेष गुणों के कारण आप सदा के लिए सबके दिलों में अडिग रहे।

आप भगवान के चरणों पर पहूँचे और वहाँ से हमें इस दुनिया में सच्ची राह दिखाइए।

आपके अस्तित्व को खोने पर भी आप सदा के लिए हमारे दिलों में विराजे हैं।

अस्तित्व

एक बार संत रामानुज मंदिर के प्राकार में प्रदक्षिण करते वक्त अंदर से कुछ हलचल सुना। तुरंत उन्होंने इस पर पूछताछ की।

पता चला कि वहाँ के नौकर भगवान की प्रसाद को ज्यादा देने के लिए मांग रहा है। इसका कारण वह इस तरह कहा कि पहले वह अकेला था लेकिन अब उसका शादी शुदा हो गया।पूरा दिन सिर्फ मंदिर में ही काम करने के नाते कहीं बाहर और कोई काम पर नहीं जा सकता। इसलिए अपने घरवालों के लिए और कुछ प्रसाद देने की बात पर धर्म कर्ता के साथ बहस कर रहा था।

मंदिर के शिष्टाचार के अनुसार एक आदमी को सिर्फ एक प्याले का प्रसाद ही मिल सकताहै। तब रामानुजाचार्य ने उस नौकर से पूछा ” तुम्हें मंदिर के गर्भ गृह में स्थित भगवान विष्णु पर भरोसा है?”

तब नौकर ने भगवान के अस्तित्व का साफ इनकार कर दिया। इस पर वहाँ इकट्ठे हुए लोगों को इस नौकर पर बडी ही नाराज आ गई। क्योंकि वह नौकर नास्तिक था।

रामानुजाचार्य ने इन लोगों को शांत किया। तब नौकर ने कहा कि उसे रामानुज पर पूरा यकीन है। इसे सुनकर संतजी ने कहा कि “तुम बिना किसी परेशानी घर जा, तेरा मांग पूरा होगा।”

लेकिन संतजी तो इस बात को बिल्कुल भूल ही गए थे। एक साल बाद उन्होंने तटाक से स्नान करके लौट रहे थे, अचानक उस नौकर को देखे, तभी उन्हें अपनी वचन की याद आई।

उस नौकर ने उनके पास आकर धन्यवाद किया। संतजी को इस पर आश्चर्य हुई। तब नौकर ने कहा कि हर दिन उसके घर एक छोटा लडका आकर एक डिब्बे भर का प्रसाद देकर जा रहा है।

इस घटना को सुनकर संतजी भगवान विष्णु को ध्यान करके रोमांचित हो गए।

*मुरलीधर स्वामी जी की भाषण से।*

एर्काड़ की झलक

पिछले शनिवार अपनी परिवार के साथ सेलम् जिले के एर्काड़ जाने की मौका मिली।

एर्काड़ समुद्री स्तर से 2,300 फुट ऊँचाई पर स्थित है। सेलम् से 30 किलोमीटर की दूर में है। एक से ढाई घंटे की रवाना करनी है। 20 हेरपिन बेंड्स है।

ऊपर जाते वक्त मधुर संगीत सुनते हुए प्राकृतिक दृश्यों को देखते हुए जाना कितना सुहावना अनुभव है, इसे शब्दों में बताना तो थोड़ा मुश्किल है।

जब हम ऊपर पहूँचे तब शीतोष्ण 20 डिग्री था। एर्काड़ ज्यादा व्यावसायिक न हुई, यह बहुत अच्छी बात है। बहुत साफ नजराती है। अन्य पहाड़ी स्थानों की तरह भीड़ अधिक नहीं है।

यहाँ काफी एस्टेट और काली मिर्च उत्पादन करनेवाले एस्टेट्स हैं। रोस गार्डन , एक झील जिसमें बोटिंग पर जा सकते हैं, अन्ना पार्क, छोटी सी थीम पार्क और शेरवराय का मंदिर देखने लायक है।

यहाँ लोग हफ्ते के आखिरी दिन बिताने अक्सर आते हैं। बेंगलुरु से ज्यादा लोग आते हैं क्योंकि वहाँ से यही आसपास की हिल स्टेशन है।

कुदरत के साथ शांतिपूर्वक अनुभव लेने के लिए यह सचमुच बेहतर जगह है। यहाँ कीमत के अनुसार अच्छे रेस्टोरेंट्स् और गेस्टहाउस भी मिलते हैं।

सेहत

स्टीव जॉब्स जिसने *ऐ पाड, ऐ फोन * की आविष्कार की, उनके उल्लेखन ।

वे मरते समय करोडपती थे। मरने से पहले उन्होंने अपने मन के भावों को इस तरह उल्लेखित किए हैं।

मैं ने आर्थिक रंग में तो ऊँचाई प्राप्त की हूँ और कई लोगों का मिसाल भी बना हूँ। आखिर सिर्फ दौलत ही मेरे पास रहा। इसे कमाने में ही मैं अपनी पूरी जिंदगी बिताई।

लेकिन अब मैं इस मरणशय्या में लेटकर बीती जिंदगी को याद करके देखूँ तो मैं ने सिर्फ दौलत कमाना ही अपना जिंदगीभर का मकसद समझा और कामयाब भी बना , वह सब अब मुझे बेकार लग रहा है।

अपने कार चलाने के लिए ड्राइवर रख सकते हैं, लेकिन अपनी बीमारी को तो किसी को नहीं दे सकते, सिर्फ हमें ही भुगतना पडेगा। दौलत से बढकर एक विषय है, वह है जीवन।

आपरेशन थिएटर जाने से पहले सबको यह बात याद में आना चाहिए *सेहत*।

परिवार , बीवी,बच्चों के साथ जरूर प्यार से बात कीजिए। अपने तन्दुरुस्ती के बारे में भी ध्यान रखिए।

हमारे उम्र के साथ हमें परिपक्वता भी मिलती है, तब हम यह भी महसूस करते हैं कि 100₹ की घडी हो या 100 डालर की घडी , दोनों में समय तो बराबर ही होती है। आप 300 स्क्वायर फीट घर में रहें या 3000 स्क्वायर फीट घर में अकेलापन तो एक ही है।

सच्चाई यही है कि जिंदगी में खुशी कभी भी भौतिक वस्तुओं से नहीं मिल सकती । इसलिए मेरा कहना है, आप अपने जीवन में सबके साथ प्यार से बात कीजिए, उनके साथ अपना समय व्यतीत कीजिए। अपने परिवार के साथ जरूर रहने का मौका बनाइए।

अपने भाई बहन, रिश्तेदारों के साथ खूब मस्ती कीजिए। उनके साथ मिलकर खाना, पीना, खेलना,गप्पे करना। ऐसे रहने से हमारी जीवन में बोझ हल्का होने का महसूस कर सकते हैं।

जो भी इस टिप्पणी को पढते हैं, अवश्य सबसे श्येर कीजिए।

मेरे अनुभव में यही असली खुशी है।

मनोभाव

तुम जो भी हो, जितने भी अनुभवशाली हो, होशियार भी क्यों न हो, किन्तु दूसरों को भी अपने तरफ़ की बात बताने का मौका दो।

सिर्फ नजरअंदाज का फैसला मत करो। क्योंकि शायद तेरी इरादा गलत भी हो सकें।

किसी पर भी उन्हें समझने से पहले अनुमान लगाने का जल्द बाज मत करो।

जो तेरे लिए कुछ खरीदना चाहता है इसका मतलब यह नहीं कि वो अपना हैसियत दिखाना चाहता है, वो तेरी दोस्ती का सम्मान करने में उत्सुक है ।

किसी भी तरह की कार्य करने में यदि कोई पहली कदम उठाया तो वह उसकी मूर्खता नहीं बल्कि वह अपनी जिम्मेदारी निभाना चाहता है कि क्यों कि उसे इस विषय का ज्ञान है।

एक लंबी बहस या लडाई जो भी हो, जब पहले इस पर कोई माफी माँगे तो इसका कारण यह नहीं कि वह गलत है, क्योंकि कि वह लोगों का मूल्य जानता है।

जो अक्सर तुझे संदेश भेजता या फोन करता तो इसका कारण यह नहीं कि वह बेकार है, वह सदा तेरी संपर्क में रहना चाहता है।

दिन, महीने, वर्ष सब कालचक्र में गुजरते जाएँं लोग एक दूसरे से अलग हो जाएँ सालों बाद जब हमारे पोते तस्वीरों को दिखाकर पूछें कि यह कौन है? तब हमारी आँखों के कोने से आँसू थोड़ा सा बाहर निकले बीती घटनाओं का याद दिलाए और बोले कि यह मेरे जीवन में एक प्रमुख व्यक्ति है।

दोस्तों को सममान करने की कोशिश में। 🙋👆👑

गृहिणी

मैं बिस्तर से उठा, तू रसोई में धुआँ वों के बीच लड रही हो।

मैं दाँतों को साफ करूँ तो तू बर्तनों को।

मैं अखबारों से विषय इकट्ठा करूँ तो तू घर के बिखरे कूड़े इकट्ठा करती हो।

मैं अपनी सफाई करूँ तो तू कपड़ों से मैलों को।

मेरी पेट भरने के लिए तू बर्तनों को रसोई से भरती।

मैं दफ्तर जाने तैयार हूँ तो तू बच्चों को स्कूल भेजने ।

मैं ऑफिस से लौटा लेकिन तू अबतक रसोई घर से नहीं लौटी।

मैं सोने गया लेकिन तू ताला लगाकर, जलती लाइट बुझाकर, बच्चों के आच्छादन ठीक कर बिस्तर पर गिरती।

हर रविवार और त्योहारों के दिनों में हमें छुट्टी मिलती, लेकिन तुम्हें घरेलू कामों से कब मिलेगी छुट्टी।

हे! मेरी जीवन साथी, आजकल मुझे यह बात झिझक रही है कि मैं काम करता हूँ।

जब कि “सेन्सस” लेने वाले से तू बोली कि तू कहीं काम न करती।सिर्फ गृहिणी हो।

असीम

एक बार संत गौतम बुद्ध अपने चेले के साथ जा रहा था। तब चेले ने उनसे अपनी फटी हुई पोशाक दिखाकर उसकी जगह नयी पोशाक की जरूरती की बात की। गौतमबुद्ध ने उसे देखा और उसे एक धोती खरीदकर दी। दोनों आश्रम लौटे।

रात सोते वक्त बुद्ध को यह बात सूझी कि शायद वह अपने शिष्यों को उनकी जिम्मेदारी की जानकारी दिया या नहीं।इसे जानने के लिए वह अपने चेले के पास गया।

चेले ने उन्हें प्रणाम करके स्वागत की। बुद्ध उससे पूछा,

“नया धोती पहने हो,ठीक है, लेकिन पुराने धोती को क्या किया?

चेला ःः पुराने धोती मेरी बिस्तर पर चादर बनी।

बुद्ध ःः तो पुराने चादर को क्या किया?

चेला ःः वह मेरी खिडकी की चिलमन बनी।

बुद्ध ःः पुराना परदा?

चेला ःः फर्श पोछने का कपड़ा ज्यादा ही टुकड़े हो गये। इसलिए इस परदे को फर्श साफ करने के लिए रख दिया।

बुद्ध ःः और उन फटी हुई टुकड़ों को क्या किया?

चेला ःः उन्हें रात की बत्ती जलाने में इस्तेमाल करुँगा।
चेले की इन बातों से बुद्ध तुष्ट होकर लौटे।

उन्हें अपने शिष्य किसी भी चीज को बेकार किए बिना हर एक की पूरी तरह से इस्तेमाल करने की आदत पर असीम खुशी हुई।