सफर 

कुछ दिन पहले हमें अपनी परिवार के साथ बंगलौर जाने की.परिस्थिति आई। देवरजी के घर में इस महीने में भगवान विष्णु की पूजा के लिए सब सदस्यों का शामिल होना अनिवार्य था।

चेन्नई से बंगलौर जानेवाली लालबाग एक्सप्रेस में हम रवाना हुए। पूजा के लिए यहाँ से ज्यादा फूल खरीदकर साथ ले गए। AC कोच होने के नाते फूलों की सूखने की संभावना नहीं थी। सौभाग्य वश हमें सेंटर टेबल की सीट मिल गई। इस पर फूलों को रखकर धागे से मैं ने माला बनाने लगी। मुझे यह काम कदापि मन पसंदित है।

थोड़ी ही देर में सामने वाली महिला से बात चीत भी शुरू हुई। पता चला कि वह एक अंग्रेजी प्रोफेसर है। पिछले साल ही उसकी बेटी की शादी हुई थी। वह अमेरिका में रहती है।

शादी की खर्चा के बारे में बात चली तो मैं बिल्कुल बेहोश हो गई।🤕। आजकल की लडकियाँ भी लडकों के बराबर हैं। पढाई कमाई सब क्षेत्रों में।फिर भी शादी की पूरी जिम्मेदारी सिर्फ लडकीवालों पर ही पडती है।

यहाँ की शादी3दिन की होती है। शादी के मंदिर की किराया लगभग 6लाख तक होती, सजावट और अतिरिक्त खर्चों के साथ।केटरिंग 15लाख तक। इसके अलावा, सोने की गहने 400ग्राम तक। चांदी के कुछ बर्तन । और ढेर सारे रेशम के कपडे। रवाना के खर्च, ब्यूटी पार्लर इत्यादि।

लडकीवालों के माँ, बाप अपने पूरे जिंदगी की कमाई इन तीन ही दिनों में खो बैठते हैं। इस हालत को बदलने के लिए कोई सुझाव है किसी के पास?????

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