असली/नक़ली

औरों की तरह रहने के लिए हम इनके नक़ल नहीं। हमारे ताकत को हममें ही ढूंढकर बाहर लाने से, ये पूरी दुनिया हमारी तारीफ करेंगी। हमारे पूरे ताकत को समेटकर आगे बढ़ें तो सफलता प्राप्त करना निश्चित ही है।

हमारे सोच विचार जिस तरफ हो,उसी तरफ हमारे कामकाज भी चलती है। सिर्फ हमारे लक्ष्य की ओर आगे बढ़ें तो जरूर विजय प्राप्त करेंगे।

नई विषयों का आविष्कार करनेवाले, अपने लक्ष्य में सफलता प्राप्त करने हेतु अपने आप को प्रोत्साहित करके, आगे बढ़ते हैं। दूसरों को हरानै का भाव उनमें नहीं होता है। आगे बढ़ने वालों के रास्ते को, कोई ताला नहीं लगा सकते हैं।

हमें कभी भी ऐसी चिंता न हो कि, कोई हमारे साथ हाथ बांटें। हमें तो दो हाथ इसलिए हैं कि एक दूसरे का साथ दें। यदि हम अपने पूरे ताकत से अपने लक्ष्य की ओर कदम उठाने को तैयार हों, तो विजय हमारे घर के सामने आकर खड़ा हो जाता है।

हममें ज्यादातर लोगों का सोच ऐसी ही है कि, हमें कोई भी इज्ज़त नहीं दे रहें हैं और हमारे लापरवाही कर रहे हैं। लेकिन सच्चाई यह है कि हम खुद अपने आप को निम्र समझ रखें हैं। सबसे पहले हम अपने आत्मविश्वास को बढाएं ताकि हमारे सोच में सकारात्मक परिवर्तन हो।

KRISHNA In Brief(As on 11.08.2020)

1) Krishna was born 5,252years ago as on 11/08/2020

2)Date of birth 18th July, 3,228BC

3)month-shravan, thithi-Ashtami, nakshatra-Rohini, Day-wednesday, Time-00.00a.m.

4)Sri Krishna lived 125years, 08months, 07days.

5)Date of death-18th February,3,102.

6)When Krishna was 89years old, the mega war (kurukshetra),took place. He died 36years after the kurukshetra war.

7) kurukshetra war took place on mrigashira shukla ekadasi, BCE 3139. i.e, started on 8th, December 3,139 and ended on 25th December, 3139.

8)There was a solar eclipse from3p.m. to 5p.m. cause the death of Jayadrath.

9) Bhishma died on, Ekadasi, Utharayan.

10)Krishna is worshipped as Krishna Kanhaiya-Mathura, Jagannath in Odisha, Vithoba in Maharashtra,Srinath in Rajasthan,Dwarakadeesh in Gujarat,Rachchod in Gujarat, Krishna in Udupi, Karnataka.

11) Biological father-Vasudev, Biological mother-Devaki, Adopted father-Nanda, Adopted mother-Yasoda, Brother-Balaram, Sister-Subadra, Birth place-Mathura. Wives-Rukmini, Satyabhama,Jambavati, Kalindi,Mitravinda, Nagnajiti, lakshmana,Bhadra.

12) Krishna is reported to have killed 4 people in his life time.1)chanoora, wrestler,2)kamsa (his maternal uncle),3)Shishupala and dantavakra (his cousins).

13) Life was not fair to him. His mother was from ugra clan and father is from Yadav clan. Inter Racial marriage.

14)He was born dark skinned and was not at all name in his entire life. People of Gokul call him, black skinned (Krishna). He was redeculed and teased for being born dark skinned and for being adopted.His childhood was wrought with life threatening situations.

15) Drought and wild wolves drove the villagers from Gokul to Vrindavan when Krishna was 9yrs old.

16) He stayed in Vrindavan till the age of 14-16. He killed his maternal uncle Kamsa in the age of 14-16 and released his biological parents from jail. He never returned to Vrindavan ever again.

17)He had to migrate from Dwaraka to Mathura due to the threat of a Sindhu king, Kala Yavana.

18)He defeated Jarasndh with the help of Vainatheya, tribes of Gomantaka hill (now Goa).

19)He rebuilt Dwaraka and left for his schooling at the age of 16-18 to Sanipani Ashram, in Ujjain.

20)He had to fight the pirates of Africa, who kidnapped his teacher’s son Punar Datta, near Prabhasa a seaport in Gujarat.

21)After his return from education, he came to know about the fatal vanavas of his cousins (Pandavas). He came to rescue his cousins from wax house and then they got married to Draupadi. His role was immense in this saga.

22)Then he helped his cousins to establish the kingdom Indraprastha. He saved Draupadi from embarassment. He stood with his cousins during their exile. He also made them to win the kurukshetra war.

23)He saw his cherished Dwaraka,washed away.

24)He was killed by a hunter,.(Jara by name) near by forest.

25)His life was not successful. His life was full of challenges.There was not single moment of peace in his entire life.

26)He faced everything and everyone with a sense of responsibility and yet stayed unattached.

27)He was the only person who knows past and future but always lived in the present.

28)He and his life is truly an example for every human being.

Jai Sri Krishna 🙏🙏🙏

ईश्वर की मांग

भगवान हमसे क्या चाहते हैं??

राजर्षि विश्वामित्र के यज्ञ की रक्षा के लिए उनके साथ गए हुए श्री राम, अपने दिएहुए कर्तव्य का पालन किए। बाद में मिथिला नगर गए और वहाँ शिव धनुष को तोड़कर, सीतामाता से ब्याह करके अयोध्या लौटे।अयोध्या में श्री रामजी को स्वागत करने केलिए और उन्हें अपने अपने ताकत के भेंट देने के लिए राज्य के लोग इकट्ठे हुए थे। उनमें से मित्रबंधु नामक एक मोची भी शामिल था।

वह श्री रामजी को भेंट में देने के लिए जूतों का सटीक जोडा बनाकर लाया था। लेकिन जब वह, औरों के महंगे तोफे को देखा तो अपने मन ही मन यह सोचकर उदास हो गया कि अपना मेहनत का तोफा, उसे बेकार लगा। वह चुपचाप भीड़ से हटकर वापस अपने घर जाने के लिए तैयार हो गया।

भगवान श्री राम ने उसे देख लिए। उन्होंने तुरंत उसे अपने पास बुलाए और प्यार से मित्रबंधु के भेंट को स्वीकार किए। और उससे कहे कि, ये जूते ही अपने पैरों के रक्षक होंगे।

जब श्री रामजी को वनवास जाना पडा ,तब उन्होंने अपने माता से अनुमति लेकर सिर्फ इन जूतों को पहनकर गए। इन्हीं जूतों को बाद में अयोध्या के राजगद्धी पर बैठने का सौभाग्य मिला। सिर्फ सच्चे दिल से समर्पित भेंट ही सदा भगवान के प्रीतिदायक हो सकता है।

संत्रास

एक साँप तेज से घिसटती हुई चल रही थी। एक बंदर के बच्चे को उस साँप को पकडने को मन लगी और तुरंत उसे पकड़ ली। तभी साँप अपने मुँह खोलकर बंदर को काटने की चेष्टा की जिसके विषैल खांगा को देखकर बंदर भयभीत होकर काँपती हुई चीखने लगी। इसकी चीख सुनकर सारे बंदर उसके पास पहूँच गए। लेकिन सब उस विषैल सर्प को देखकर पानी का पानी हो गए। सभी को यह समझ में आ गई कि जब बंदर अपनी पकड को थोड़ा ढीला करेगी, तुरंत साँप उसे काटकर मार डालेगी। इसलिए सारे बंदरों का झुंड छोटी बंदर को निस्सहायता से देखकर उसे अपने तकदीर पर छोड़कर चले गए।

बंदर का बच्चा अपनी ही झुंड की निस्सहायता तथा अपनी शैतानी पर बहुत ही दुखी होकर , डर से रोदन करने लगी। समय काट रही थी। बंदर धीरे धीरे अपने विश्वास खोने लगी। भूख और प्यास उसे सताने लगी।बहुत देर हो गई। उसे चक्कर आने लगी। तभी वहाँ एक संत आए। उन्हें बंदर की हालत मालूम हो गई। उन्होंने बंदर से साँप को फेंक देने की सलाह दी। बंदर साँप के काटने की डर को व्यक्त की। संत ने कहा साँप बहुत देर पहले ही मर गई है। तभी बंदर को सूझी कि अपने मजबूत पकड़ के कारण साँप मर गई है।

इसी तरह हमलोगों में से ज्यादातर लोग चिंता नामक साँप को पकडकर इसे छोडे बिना अपने आप को सदा के लिए दुखी रखते हैं। चिंता को दूर करने से ही सुख मिलती है।

घमंड से हृदय संबंधित, चिंता से पेट संबंधित, दुःख तथा रोदन से श्वास संबंधित, भय और शक से गुर्दा संबंधित और गुस्सा या जलन उत्तोलक संबंधित बीमारियों का कारण होता है। शांतिपूर्ण जीवन ही बेहतरीन जीवन होता है। तन्दुरुस्ती बदन से ही बेहतरीन  सोच विचारों का आविष्कार होता है। बेहतरीन जीवन के लिए अच्छे रास्ते को अपनाएँ और आगे बढें।

निंदा की असर

एक जंगल में एक ऋषि तपस्या कर रहे थे। वे तपस्या के बीच में ही अपने आँखों को बिना खोले, हाथ बढाते थे, आस पास के गांव से जो लोग उन्हें दर्शन करने आते थे, वे उनके हाथ में फलों को काटकर रखते थे। ऋषि इन्हें खाते थे। लोगों का विश्वास था कि ऋषि को खिलाने से उनके जीवन के कष्ट दूर हो जाएगा।

एक दिन उस राज्य का राजा शिकार करने के लिए जंगल आया था। उसने ऋषि को देखा। लेकिन उस समय जंगल में राजा और ऋषि के अलावा कोई नहीं था। तभी ऋषि ने अपना हाथ बढाया। राजा ने मजाके में अपने घोड़े का गोबर थोड़ा सा लेकर ऋषि के हाथ में रख दिया। ऋषि ने भी अपने आँखों को खोले बिना गोबर को अपने मुँह में डाल दिया। इसे देखकर राजा ने जोर से हँसते हुए वहाँ से निकला।

अगले दिन राजा के दरबार में एक ज्ञानी पधारे और अपने दिव्य दृष्टि से राजा के पिछले दिन की व्यवहार की याद दिलाकर उन्हें चेतावनी देते हुए कहा कि, राजा के कुकर्म का नतीजा यह है कि, नरक में उसकी मृत्यु के बाद ऋषि के हाथ में जिस प्रकार के गोबर को रखा था, बिलकुल उसी प्रकार की गोबर की एक छोटी सी पहाड़ जैसी इकट्ठा हुई है, जिसे राजा को हर दिन खिलाया जाएगा।

इस बात पर राजा बहुत ही घबरा गए और अपने दुष्कर्म का प्रायश्चित के लिए राजगुरु के सलाह के अनुसार अपने महल के बगीचे में एक कुटीर बनाया। शानदार जीवन को छोड़कर उसी कुटीर में रहने लगा।राज्य के कन्याओं को वहाँ बुलाकर उन्हें नैतिकता का मूल्य समझाकर, उनके विवाह के लिए उचित धन, जेवर देकर उन्हें वापस भेज रहा था। लेकिन कुछ लोग राजा के इस व्यवहार को दोष देकर उन्हें बुरी तरह प्रचार करने लगे।

ऐसी हालत में एक बार एक गुणवती, अपने अपाहिज पति को लेकर भीख मांगने राजा के कुटीर के सामने आई। तभी उसकी पति ने इसे वहाँ खडे होने से मना करते हुए राजा की निंदा की। वह गुणवती पत्नी अपने पति के बातों पर खिन्न होकर उसे अपनी पतिव्रता शक्ति द्वारा सारे वृत्तांत को जानकर, उसे समझाई।

राजा अपने पाप का प्रायश्चित कर रहा है, जिसे कुछ लोग राजा को बुरी तरह से समझ कर प्रचार कर रहे हैं। इससे जो कोई भी राजा के अच्छे कामों को बुरी तरह दिखाने की कोशिश करें, उसे राजा के लिए नरक में इकट्ठा हुई गोबर का मुट्ठी भर का खाने के लिए दिया जाएगा। वैसे ही वहाँ इकट्ठा हुई पूरा गोबर अब तक खतम हो गई है।

गलत कामों पर पछताकर जो अपने को सुधार कर अच्छे कामों में लग जाय, उसे बुरी रंग चढाने वालों को इनके पाप का हिस्सा भुगतना पडता है।