गुरु श्री आदिशंकराचार्य के उपदेश से।

जंगल के शेर कभी भी अपने बच्चों से खाना नहीं माँगती, गाय लेटकर अपने बच्चे से पानी देने को नहीं कहती। इस दुनिया के सभी जीवराशियाँ मरते दम तक अपने काम स्वयं करते हैं। किसी का भी सहारा नहीं लेते हैं। लेकिन सिर्फ मानव जाति ही एक ऐसा प्राणी है, जो दूसरों के सहारे को सदा अपनाती है।वह भी बुढापे में इनका सहारा अनिवार्य होता है।

इस बात पर ध्यान देना, इन सबका कारण केवल हमारा सोच और विचार ऐसा हो गया है। सोच बदलकर आरोग्यपूर्ण जीवनशैली को अपनाएँ।सोच बदलने पर सब कुछ जरूर बदल जाता है।

मैं, मैं, मैं।।

मैं ने कमाया। मैं ने घर बनाया। मैं ने उसे बचाया। मैं ने उसका सहारा दिया, यदि मैं न हूँ तो इसका नतीजा सोच भी नहीं पाओगे। ऐसा “मैं” का अहंभाव ही इन सबका कारण है।

क्या हम ऐसा कह सकते हैं कि, मैं ही हृदय को चला रहा हूँ, मैं ही पेट के अंदर से खाने को जीर्ण करना और उनमें से पोषक पदार्थों को अलग करके रक्त से मिलाकर पूरे शरीर में फैलाने की काम करता हूँ, किड्नी के कामों को काबू में रखता हूँ, जैसे🤔🤔???

ये सारे काम अपने आप करने का कारण जो है, वही स्रृष्टिकर्ता को “मैं” कहने का अधिकार है। इसलिए हम “मैं” का अहंकार भाव को छोडकर सबके साथ प्यार भाव से रहें। इस जिंदगी के बारे में चिंता मत करना, यह भगवान की देन है, भविष्य के बारे में भी ज्यदा मत सोचना। वह भी ईश्वर से तय किया गया है।

अपने से बेहतर रहनेवालों से तुलना मत करें, इससे हम दुःखी होंगे। हम से निम्न रहनेवालों का भी मजाक न उडाएँ। हम हम ही रहें जिससे हमारे आत्मविश्वास बढें।

आप आप ही रहिए।

आप जैसे रहना चाहते हैं, वैसे ही रहिए। औरों को देखकर उनके तरह रहने की कोशिश कभी मत कीजिए। इससे अपने अस्तित्व को खो बैठते हैं।ढेर सारे विषयों को मन में सोचतेहुए अपने आप को परेशान मत कीजिए। औरों से तुलना करके अपने चैन को मत खो बैठिए।

दो अलग अलग गुरूओं के शिष्य मिलकर आपस में बातचीत कर रहे थे। पहले शिष्य ने अपने गुरु की प्रशंसा करते हुए कहा, “मेरे गुरुजी नदी के ऊपर पैदल चलते हैं, हवा में उडकर ऊपर जा सकते हैं, आग में कुछ घंटों तक बैठ सकते हैं। क्या! तुम्हारे गुरुजी ऐसे रोमांचक चमत्कार करके दिखाते हैं?”

दूसरे चेले ने कहा, “मेरे गुरुजी तो नदी के पानी में नहाते हैं, हवा में श्वास लेते हैं, आग से खाना पकाते हैं।” उनका कहना है, किसी भी तरह के चमत्कार किए बिना साधारण जीवन बिताना ही बेहतर होगा। औरों को खुश रखने की कोशिश में आप अपने जिंदगी के खुशियों को कभी मत खोना चाहिए। अपने जिंदगी अपने लिए जियो।

वर्तमान की छोटी छोटी खुशियों को नामुमकिन सी काल्पनिक सपनों के कारण बरबाद मत कीजिए। अपने इस छोटी सी जिंदगी को पूरी तरह से जिएँ।