Interesting
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💚 ᴅᴏ ᴡᴇ ᴋɴᴏᴡ ᴀᴄᴛᴜᴀʟ ғᴜʟʟ ғᴏʀᴍ ᴏғ sᴏᴍᴇ ᴡᴏʀᴅs ? 💚
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💛 ᴏᴋ 💛
ᴏᴛᴛᴏ ᴋʀᴏᴠᴇɴs

💛 ɴᴇᴡs ᴘᴀᴘᴇʀ 💛
ɴᴏʀᴛʜ ᴇᴀsᴛ ᴡᴇsᴛ sᴏᴜᴛʜ ᴘᴀsᴛ ᴀɴᴅ ᴘʀᴇsᴇɴᴛ ᴇᴠᴇɴᴛs ʀᴇᴘᴏʀᴛ

💛 ᴄʜᴇss 💛
ᴄᴀᴍᴇʟ, ʜᴏʀsᴇ, ᴇʟᴇᴘʜᴀɴᴛ, sᴏʟᴅɪᴇʀs

💛 ᴄᴏʟᴅ 💛
ᴄʜʀᴏɴɪᴄ ᴏʙsᴛʀᴜᴄᴛɪᴠᴇ ʟᴜɴɢ ᴅɪsᴇᴀsᴇ

💛 ᴊᴏᴋᴇ 💛
ᴊᴏʏ ᴏғ ᴋɪᴅs ᴇɴᴛᴇʀᴛᴀɪɴᴍᴇɴᴛ

💛 ᴀɪᴍ 💛
ᴀᴍʙɪᴛɪᴏɴ ɪɴ ᴍɪɴᴅ

💛 ᴅᴀᴛᴇ 💛
ᴅᴀʏ ᴀɴᴅ ᴛɪᴍᴇ ᴇᴠᴏʟᴜᴛɪᴏɴ

💛 ᴇᴀᴛ 💛
ᴇɴᴇʀɢʏ ᴀɴᴅ ᴛᴀsᴛᴇ

💛 ᴛᴇᴀ 💛
ᴛᴀsᴛᴇ ᴀɴᴅ ᴇɴᴇʀɢʏ ᴀᴅᴍɪᴛᴛᴇᴅ

💛 ᴘᴇɴ 💛
ᴘᴏᴡᴇʀ ᴇɴʀɪᴄʜᴇᴅ ɪɴ ɴɪʙ

💛 sᴍɪʟᴇ 💛
sᴡᴇᴇᴛ ᴍᴇᴍᴏʀɪᴇs ɪɴ ʟɪᴘs ᴇxᴘʀᴇssɪᴏɴ

💛 sɪᴍ 💛
sᴜʙsᴄʀɪʙᴇʀ ɪᴅᴇɴᴛɪᴛʏ ᴍᴏᴅᴜʟᴇ

💛 ᴇᴛᴄ 💛
ᴇɴᴅ ᴏғ ᴛʜɪɴᴋɪɴɢ ᴄᴀᴘᴀᴄɪᴛʏ

💛 ᴏʀ 💛
ᴏʀʟ ᴋᴏʀᴇᴄ (ɢʀᴇᴇᴋ ᴡᴏʀᴅ)

💛 ʙʏᴇ 💛
ʙᴇ ᴡɪᴛʜ ʏᴏᴜ ᴇᴠᴇʀʏᴛɪᴍᴇ.

💚 sʜᴀʀᴇ ᴛʜᴇsᴇ ᴍᴇᴀɴɪɴɢs ᴀs ᴍᴀᴊᴏʀɪᴛʏ ᴏғ ᴜs ᴅᴏɴ’ᴛ ᴋɴᴏᴡ 💚

संतों के दर्शन

   नारद मुनि को एक बार श्री महाविष्णु से अपने मन की बात कहने का अवसर मिला। उन्होंने श्री विष्णु से पूछा कि संतों के दर्शन का प्रभाव क्या हो सकता है। महाविष्णु ने नारद से पृथ्वी की ओर संकेत करते हुए , वहां जंगल में एक छोटी सी कीड़े की जन्म हुई है, जाकर उससे पूछने को कहा।

   नारदजी भी उस कीड़े से संतों के दर्शन करने का नतीज़ा के बारे में पूछा। जब कीड़े ने नारदजी को देखकर अपनी मुंह खोली तुरंत उसकी मृत्यु हो गई। नारदजी परेशान से विष्णु से इस संगठन के बारे में चिंतित हो कर कहा। अब विष्णु ने उसी जंगल में एक पेड़ पर एक तोते की अंडे से नवजात शिशु से पूछने को कहा।

    नारदजी फिर से अब तोते की बच्ची से यही प्रश्न की। तोते की बच्ची भी नारदजी को देखकर अपनी मुंह खोली और वह भी तुरंत मर गई। इस बार नारदजी घबरा गये और विष्णु से अपने साथ ऐसे मत खेलने को कहा। लेकिन इस बार एक ब्राह्मण के घर की गाय एक बछड़े को जन्म दिया है और उससे पूछने को कहा। नारदजी साफ इन्कार करते हुए गो हत्या पाप अपने ऊपर पड़ने की चिंता व्यक्त की। फिर भी विष्णु ने गाय की बछिया से पूछने को कहा।

नारदजी कुछ घबराहट से ही बछिया से संतों के दर्शन करने से होने वाली नतीजे के बारे में पूछा। जब बछिया ने अपनी मुंह खोली तुरंत वह भी मर गई।

नारदजी क्रोध और परेशान हो गए। उन्होंने विष्णु , अपने प्रश्न को उत्तर देने के बजाय हर बार किसी नवजात शिशु के पास भेजकर उनसे प्रश्न करना और इस कारण उनके मृत्यु होना देखकर दुःखी हो गये। इसी को उन्होंने विष्णु से व्यक्त किये।

विष्णु मुस्कुराते हुए इस बार काशी महाराज को क‌‌‌ ई सालों के बाद एक संतान हुई है और उस लड़के से पूछने को कहा। नारदजी ने इन्कार करते हुए कहा, कि,” इस बार कोई दुर्घटना हुई तो अपने ही जान की खतरा हो सकती है इसलिए मैं जाने के लिए तैयार नहीं हूं। “फिर भी विष्णु ने उसे समझाया और जाकर राजकुमार से प्रश्न करने को कहा।

नारदजी को देखकर काशी महाराज बहुत ही खुश हो गये। नारदजी के अतिथि सत्कार बेहतरीन तरीके से किये। नारदजी अपने अंदर की डर को छुपाकर धीरे से शिशु राजकुमार से अपने मन की प्रश्न पूछे। और अपने आंखों को बंद कर लिए। तब वहां खूब हंसने की आवाज़ सुनाई दी। आश्चर्य से नारदजी देखें तो उसे देखकर बालक ने कहा कि, “आप जैसे संतों की दर्शन के कारण ही मैं कीड़े से चिड़िया , और चिड़िया से गाय और अब राजकुमार हुआ हूं। आपके दर्शन के कारण जल्दी से जल्दी ही मैं इस उत्तम जन्म को पाया हूं।”। इस पर नारद मुनि बेहद संतुष्ट हो ग्ए और श्री महाविष्णु को अपनी धन्यवाद देते हुए देवलोक लौट गए।

Rearranged

This has got to be one of the cleverest msgs I’ve received for a while. Someone out there either has too much spare time or is deadly at Scrabble. (Wait till you see the last one!)

  • – – – – – – – – – – – – – – – – – – – – –
    1. DILIP VENGSARKAR
    When you rearrange the letters:
    A SPARKLING DRIVE
    1. PRINCESS DIANA
      When you rearrange the letters:
      END IS A CAR SPIN
    2. MONICA LEWINSKY
      When you rearrange the letters:
      NICE SILKY WOMAN
  1. DORMITORY
    When you rearrange the letters:
    DIRTY ROOM
  2. ASTRONOMER
    When you rearrange the letters:
    MOON STARER
  3. DESPERATION
    When you rearrange the letters:
    A ROPE ENDS IT
  4. THE EYES
    When you rearrange
    THEY SEE
  5. A DECIMAL POINT
    When you rearrange the letters:
    I M A DOT IN PLACE AND FOR THE GRAND FINALE
    MOTHER-IN-LAW
    When you rearrange the letters:
    WOMAN HITLER…

Enjoy the brain exercise.

ENGLISH LANGUAGE DAY

27.05.21 Thursday
Beauty of English Language
+++
On the occasion of ENGLISH LANGUAGE DAY here are some Interesting facts about English language.
♦️No words in the English language rhyme with “month”, “orange”, “silver” or “purple.”
♦️“Hungry” and “Angry” are the only words in the English language that end in “-gry.”
♦️The number 4 is the only number that has the same number of letters in it – FOUR.
♦️Did you know the word ‘Underground’ is the only word that begins and ends with the letters ‘und’ ?
♦️The word ‘Uncopyrightable’ is the is the only 15 letter word that can be spelled without repeating any letter.
♦️The word ‘Typewriter’ is the longest word that can be typed using only the top row of a keyboard.
♦️Did you know the sentence “The quick brown fox jumps over the lazy dog” uses every letter in the English alphabet ?
♦️The word ‘Rhythm’ is the longest word without a vowel.
♦️”Dreamt” is the only word that ends in “mt.”
Did you know there are only 3 sets of letters on a keyboard which are in alphabetical order – ‘F G H’, ‘J K L’, ‘O P’ ?
“queue”
♦️The word “queue” is the only word in the English Language that is still pronounced the same way when the last four letters are removed.
♦️”Dammit I’m mad” is the same spelt backwards.
♦️”Set” of all the words in the English Language, the word “set” has the most definitions.
♦️”Bookkeeper” & “Bookkeeping” are only words in English language with 3 consecutive double letters.
♦️The least used letter in the alphabet is Q.
♦️The most commonly used word in English conversation is ‘I’.
♦️The dot on top of the letter ‘i’ is called a tittle.
♦️There are only 4 words in the English language which end in ‘dous’ ( they are: hazardous, horrendous, stupendous and tremendous ).
♦️The oldest word in the English language is ‘town’.
♦️The word ‘Strengths’ is the longest word in the English language with just one vowel.
♦️The past tense for the English word ‘dare’ is ‘durst’.
♦️The first English dictionary was written in 1755.
😇

Now instead

A beautiful poem by nobel laureate Sir Robindra Nath Tagore.

When I’m dead.
Your tears will flow
But I won’t know
Cry with me now instead.

You will send flowers,
But I won’t see
Send them now instead

You’ll say words of praise
But I won’t hear.
Praise me now instead

You’ll forgive my faults,
But I won’t know…..
So forget them now instead.

You’ll miss me then,
But I won’t feel.
Meet me now, instead.

You’ll wish You could have
spent more time with me,
Spend it now instead

When you hear I’m gone, you’ll find your way to my house to pay condolence but we haven’t even spoken in years.
Look , listen and reply me now.

Spend time with every person around you, and help them with whatever you can to make them happy, your families, friends and acquaintances.
Make them feel Special because you never know when time will take them away from you forever.

Alone I can ‘Say’ but together we can ‘Talk’.

Alone I can ‘Enjoy’ but together we can ‘Celebrate
Alone I can ‘Smile’ but together we can ‘Laugh’

That’s the BEAUTY of Human Relations.
We are nothing without each other
So Stay Connected!!
I feel proud to say I love the God and HIS image that’s YOU, YOU & YOU !!!
🙏🙏🏼🙏🏼🙏🏼

Current situation

Someone has nicely explained the irony in the present situation:

“ Never have I seen
such a mess in life.

The air is pure but
wearing a mask is
mandatory.

Roads are empty
but it is impossible
to go on long drive.

People have clean
hands but there is a
ban on shaking hands.

Friends have time to
sit together but they
cannot get together.

The cook inside you
is crazy, but you cannot
call anyone for lunch or
dinner.

Every Monday,
the heart longs to go out, but the weekend does not seem to end.

Those who have money
have no way to spend it.

Those who don’t have
money have no way to
earn it.

There is enough time
on hand but you can’t
fulfill your dreams.

The culprit is all around
but cannot be seen.

A world full of irony!
Be positive but test negative.”

शरणागत।

   कुरुक्षेत्र युद्ध के लिए युद्ध भूमि सिद्ध की जा रही थी। तब वहां के बड़े बड़े वृक्षों को हाथियों के सहारे उखाड़ फेंक रहे थे। और मैदान को ठीक कर रहे थे।

    तब वहां एक पेड़ पर अपनी छोटी सी बच्चियों के साथ रहने वाली एक चिड़िया घोंसले के साथ नीचे गिर गई। उसके बच्चों को पंख न होने के कारण उड़ नहीं सकते थे। वह चारों तरफ अपनी नज़र घुमाई। उसके नजरों में कृष्णार्जुन दिखाई दिए। तुरंत वह उनके रथ के ऊपर उड़कर बैठी और श्री कृष्ण से अपने बच्चों को बचाने के लिए प्रार्थना की। क्यों कि अगले दिन युद्ध शुरू होनेवाला था। श्री कृष्ण ने कहा जो होना है,वह जरूर होगा और इसे कोई  रोक नहीं सकता । चिड़िया ने कहा, “मैं सिर्फ आप पर भरोसा रखीं हूं, यदि हमें जीना है या मरना, मैं आपही के हाथों में सौंप दिया हूं।” कालचक्र घूमता रहता है। यही श्री कृष्ण का जवाब था। अर्जुन को कुछ भी समझ में नहीं आया।

    युद्ध शुरू होने से पहले, श्री कृष्ण, अर्जुन से अपने धनुर्बाण लाने को कहा। अर्जुन को आश्चर्य हुआ, क्योंकि श्री कृष्ण युद्ध में शस्त्रों का प्रयोग न करने की हामी दिए थे। श्री कृष्ण अपने धनुष से एक हाथी को निशाना लगाया, (वही हाथी थी, जो चिड़िया की घोंसले को गिराया था) और ठीक उसके कंठ में बन्धित घंटी को तोड दिया। इस पर अर्जुन को कृष्ण पर हंसी आई और अपने धनुर्विद्या प्रावीण्यता पर गर्व महसूस हुई। उसने श्री कृष्ण से कहा कि वह हाथी को सही निशाना लगाकर मारें। श्री कृष्ण मुस्कुराकर , चिड़िया की घोंसले को गिराने का सजा यही है, कहकर धनुर्बाण को रथ के अंदर रखने को कहा। अर्जुन को कुछ भी समझ में नहीं आईं।

    १८दिन के कुरुक्षेत्र युद्ध के बाद पांडवों की जीत हुई। श्री कृष्ण और अर्जुन युद्ध भूमि को घेर रहे थे। तब श्री कृष्ण अर्जुन से वहां गिरी हुई घंटी को हटाने को कहा। अर्जुन को आश्चर्य हुआ कि ढेर सारे कामों के बीच में यह घंटी हटाने की बात उसे अनावश्यक लगा। लेकिन जब अर्जुन ने घंटी को उठाया तब उसमें से एक चिड़िया अपने बच्चों के साथ उड़ी। वह श्री कृष्ण को अपने परिवार को बचाने के लिए , धन्यवाद देते हुए अपने पंखों को जोड़कर प्रणाम की।

   अर्जुन तब भगवान श्री कृष्ण से माफी मांगते हुए कहा कि ” हे भगवान श्री कृष्ण, आप मेरे साथ साधारण मानव जीवन बिताने के कारण , मैं आपको हमारे ही तरह देखने लगा। हे परमात्मा, आप सब कुछ ठीक से जानते हैं और यह भी कि, जो आपको पूरी तरह से शरण करते हैं उन्हें बचाने वाले भी आप ही हैं।”

    परित्राणाय साधूनां, विनाशाय च दुष्कृतां।        धर्म संस्थापनार्थाय, संभवामि युगे,युगे।। जय श्री कृष्ण। 🙏🙏

रामायण

“रा” मानें उजाला, “मा” का मतलब है अपने ही अंदर। रामा का अर्थ है, अपने अंदर की रोशनी। राम के जननी, जनक हैं, कौशल्या और दशरथ। दशरथ का मतलब है , दस रथ। पांच ज्ञानेंद्रियों और पांच कर्मेंद्रियों को दस रथों से तुलना की गई है। कौशल्या मानें हमारे प्रवीण (कोशलता),। कौशल्या नामक सारथी दस इंद्रियों को अपने वश में लिए राम का जन्म दिए हैं। मानें जब दस रथों को कौशल्य से प्रयोग किया जाता है,तब एक चमक उत्पन्न होती है।

राम का जन्म अयोध्या में हुआ। “अयोध्या”, का मतलब है, कभी भी युद्ध नहीं हो। मानें जब हमारे भीतर किसी भी तरह की झंझट न हो तो, सिर्फ चमक ही प्रकाशित होती है।

रामायण केवल एक पौराणिक इतिहास ही नहीं, बल्कि यह, आध्यात्मिकता, तत्वज्ञान तथा गहरासत्य के प्रतीक माना जाता है।

कहा जाता है कि रामायण हमारे अंदर ही चलता रहता है। हमारी आत्मा – राम, बुद्धि – सीता , श्वास – हनुमान (प्राण), जागरूकता – लक्ष्मण , और अभिमान ( घमंड)- रावण। जब बुद्धि (सीता) अभिमान (रावण) से चुराया जाता है, तब आत्मा (राम) , परेशान हो जाता है।

अब आत्मा (राम) , बुद्धि ( सीता) तक नहीं पहुंच सकती है। तो प्राण (हनुमान) और जागरूकता (लक्ष्मण) के सहारे से आत्मा (राम) , बुद्धि (सीता) से मेलन हो जाती है। और घमंड (रावण) का अंत हो जाता है।

असलीयत में रामायण एक अनंत घटना है, जो सदा ही हममें चलता रहता है। 🙏 जय श्री राम। 🙏

श्री चंद्रशेखर सरस्वती स्वामी जी की कृपा।🙏🙏

  शंकराचार्य श्री चंद्रशेखर सरस्वती स्वामी जी उन दिनों में कभी कभी किसी जगह जाकर वहां के लोगों को अपने आशीर्वाद देते थे और वहीं कुछ दिन ठहर भी जाते थे। वैसे ही गुरूजी ने एक बार कर्नाटक राज्य के बेलगाम में कुछ दिन ठहरे थे। तब वहां रोज एक ग्वाला आकर‌ दूध देकर जा रहा था। लेकिन वह सदा उदास दीखता था। पूछने पर पता चला कि उसकी पत्नी की तबीयत ठीक नहीं है और वह कैन्सर के कारण अपनी आखरी दिन गिन रही है। डाक्टर ने भी उसे बचाने की उम्मीद छोड़ दिए हैं।

   इस बात को जानकर एक दिन गुरूजी ने उसे अपने यहां बुलाया। उन्होंने ग्वाला से अपने बीबी की पसंदीदा खाना के बारे में पूछा। ग्वाला की बीबी मिर्च खाना बहुत पसंद करती है। तो गुरूजी ने उसे वहीं मिर्च रोज खाने को कहा।

  आश्चर्य की बात यह है कि ग्वाला की बीबी जो कई दिनों से बिस्तर से उठ नहीं पा रही थी, वह धीरे धीरे अपनी घर के कामों को करने लगी। एक महीने के बाद ग्वाला ने अपनी पत्नी को डाक्टर के पास ले गया। उसके स्केन रिपोर्ट देखकर डाक्टर अवाक् रह गये।

   डाक्टर ग्वाला से पूछा कि कौन-सा दवाई देकर वह अपनी पत्नी को ठीक किया। ग्वाला ने कहा वह सिर्फ गुरूजी पर भरोसा किया और उसकी पत्नी अपनी मनपसंद मिर्ची ही खाकर ठीक हुई है।

    गुरु शंकराचार्य श्री चंद्रशेखर सरस्वती स्वामी जी के ऐसे ढेरों भक्तों के और उनके अपने अपने परेशानियों से मुक्ति पाने के बारे में हमें, हरेक के जीवन में से , जानने को  मिलती है। वे सच में अंबा कामाक्षी देवी के स्वरूप में माने गए हैं।