Dr. Naden neurologist in MIT , USA is explaining how to visualize human anatomy through Ramayana

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केले का पत्ता

बिस्तर के व्रणों के परेशानियों को भगाने का एक बेहतर दवा है, यह केले का पत्ता। जी हाँ!!

हमारे पडोसिन बहुत दिनों से मधुमेह की वजह से बिस्तर में पडे रहे थे। इसलिए उसके पीट पर व्रण फैलने लगे, जिसके कारण वे बहुत ही बेचैनी महसूस कर रहे थे। कई तरह के दवाइयों के इस्तेमाल किए, लेकिन इनका किसी भी तरह का सकारात्मक परिणाम न मिला। इससे घर के सभी लोग व्याकुल हो रहे थे। तभी उनके घर की नौकरानी ने अपनी सलाह दी।

वह है केले का पत्ता। लेकिन इस पर किसी का भी यकीन न हुआ। सब लोग इसका मजाक भी किए। फिर भी इस तरीक़े को कोशिश करके देखने की फैसला किए।

पहले घाव को साफ करके उस पर एक ठीक तरह से साफ की गई केले के पत्ते को रखना है। 48 घंटों में घाव धीरे धीरे घटने लगती है और एक ही हफ्ते में व्रण बिलकुल गायब हो जाती है।

यदि आपके कोई जाने पहचाने लोगों को इस तरह की इलाज की जरूरत हो तो जरूर इस तरीके का जानकारी दीजिए।

तिलचट्टा का प्रभाव

गूगल सुंदर पिच्चै ने शेयर किए हैं।

एक रेस्टोरेन्ट में मैं बैठ कर काफी पीते हुए चारों तरफ अपना नजर घुमा रहा था।

अचानक एक तिलचट्टा उडते हुए आकर एक औरत के ऊपर बैठी, बस उस औरत ने डर के मारे चिल्ला चिल्लाकर हलचल मचा दी। अब वह तिलचट्टा उडकर और एक औरत के ऊपर बैठी । फिर से वही चिल्लाहट। तब वहाँ मौजूद एक बेरर उस औरत के पास जाकर खडा, अब वह तिलचट्टा बेरर के ऊपर चढी। बेरर चुपचाप इसकी गमन पर अपने लगन लगाया और जब वह एक स्थान पर रूकी तो तुरन्त उसे अपने हाथ में दबाए, होटल के बाहर फेंक दिया।

मैं काफी पीते हुए ये सारे हंगामा को देख रहा था। यदि इस हंगामा का वजह तिलचट्टा हो तो, वह बेरर शांतिपूर्ण कैसे हो सकता है?? तो उन महिलाओं के हंगामा का कारण तिलचट्टा नहीं बल्कि, उन्हें इस हालत को संभालने का तरीका शायद मालूम नहीं हो।

यदि मेरे अपने आफिस में या घर में या तो और कहीं भी किसी के साथ बहस के कारण मैं अपने शांति को खोया तो उसका कारण शायद यही हो सकता है, कि मुझे उस हालत को संभालने का तरीका महसूस न हो।

हमारे जिंदगी में परेशानियाँ और समस्याओं का कारण सिर्फ यही हो सकता है कि, हमें उनमें से सुझावा पाने के बिना कभी कभी अनजाने में उस हालत को और भी जटिल बनाकर बाद में पछताने लगते हैं।

अचानक होनेवाले घटनाओं को कोई भी अपने काबू में नहीं रख सकते हैं, लेकिन यदि सोचकर सावधानी के साथ संभालेंगे तो परेशानियों का सुझावा मिल जाता है।

सोच

सोच बहुत ही शक्तिशाली होती है। सिर्फ एक बार की सोच शक्तिशाली नहीं हो सकती, लेकिन जब एक सोच को बार बार सोचने पर उसका धीरे धीरे कार्यरूप होने का अनुभव मिल सकता है। इसी कारण मंदिरों में लक्षार्चन्, कोटि अर्चना की जाती है।

समान सोचवालों को अपने तरफ आकर्षित करती है। इससे सोच की शक्ति और भी बढती है। अनेकों को कार्यसिद्ध होने की प्रेरणा देती है।

खयालों को ब्रह्म से तुलना कर सकते हैं। क्योंकि सोच द्वारा कई विषयों का आविष्कार होती है। यदि कोई भी सोच असफल हो, तो इसका कारण शायद इससे भी शक्तिशाली सोच इसे दबाव में रखने तक की ताकत सोच हो सकता है। हमारे खयालों में जो उच्चतर सोच हो,वो ही हमारे वर्तमान स्थिति का कारण है। यदि हमारी परिस्थिति समाधानप्रद न हों, तो हमें जरूर अपने सोच को बदलना चाहिए।सोच बदलने से जरूर सबकुछ बदलता है।यह सत्य है।

सहनशीलता तपस्समान है। तृप्ति एक सुखद अनुभव है। अन्य प्राणियों पर करूणा पूर्ण रहना उत्तम गुण माना जाता है। क्षमता एक बेहतर औजार है।

हारने पर भी, अंधकार को छेदनेवाला सूर्य किरणों की तरह जीवन में आगे बढना है। ताकतों तक नहीं बल्कि , अपने मंजिल तक।

खिले चेहरे से, भरोसे के साथ नए दिन का स्वागत करें। ईश्वर सबको अच्छे राह दिखाएँ।

🙏🙏🙏

आदि शंकराचार्य जयन्ती। 🙏।

ऊँ गुरु ब्रह्मा, गुरुर्विष्णुः, गुरु देवो महेश्वरः।

गुरू साक्षात् परब्रह्मा, तस्मै श्री गुरवे नमः।।

सदाशिव समारंभां,शंकराचार्य मध्यमां।

अस्मदाचार्य पर्यन्तां,वन्दे गुरु परंपराम्।।

श्री गुरु चरणारविन्दाभ्यां नमो नमः।🙏।।

आजकल के समय में हमलोग , जप,पूजा, अर्चना, स्तोत्र पारायण आदि को एक नियमानुसार कर रहे हैं, वो सब आदि शंकराचार्य द्वारा निर्धारित की गई है। वे ही इस सनातन धर्म का मार्गदर्शी हैं।

आज का दिन वैशाख शुक्ल पंचमी तिथि।इसी दिन श्री आदि शंकराचार्य के जन्मदिन है। इस दिन कई क्षेत्रों में इस शुभ दिन को मनाया

जा रहा है। हम भी इस समारोह में भाग लेकर, पूजा, जप, स्तोत्र पारायण करके धन्य हों।

जय जय शंकर। हर हर शंकर।।