किस्मत। (विधि)

देवेंद्र की पत्नी इन्द्राणी  एक तोते को बडी प्यार से पाल रही थी। अचानक उस तोते की तबीयत खराब हो गई। वैद्य आकर उसकी जांच की और बोला कि यह तोता अपनी अंतिम दशा में है।

इन्द्राणी रोने लगी और अपने पति से किसी भी तरह अपनी प्यारी तोते की जान बचाने की प्रार्थना की।

तब इन्द्र सृष्टि कर्ता ब्रम्हा के पास गया और तोते की हालत  समझाकर इसे बचाने की विनती की। 

ब्रह्मा ने कहा वह हो तो सृष्टि कर्ता ही लेकिन बचाने की काम तो भगवान विष्णु का है।

तुरंत दोनों मिलकर विष्णु के पास जाकर परिस्थिति की जानकारी दी और फिर तोते को बचाने की निवेदन की। पूरी बात सुनकर विष्णु भी अपनी असहायता को स्पष्ट करते हुए बोले कि वह सबका संरक्षक है, लेकिन अंतिम दशा में केवल शिव ही बचा सकता है।

फिर तीनों एक साथ भगवान शिव के पास गए और इस मुसीबत की सुझाव की विनती की। शिव बोले वह इस काम पर यमराज को जुटा दिया।

आखिर चारों यमराज से कुछ भी करके तोते की जान बचाने को कह दिएँ।

यमराज सबके जान को लेने की समय अलग अलग पत्तों पर लिखकर लटका देता है, जब वो पत्ता गिरेगी तब उसकी जान निकल जाएगी।

पाँचों एक साथ जब उश पत्तों की कमरे में कदम रखें तब एक पत्ता नीचे गिरी। उसमें लिखा था ” जब इन्द्र, ब्रह्मा, विष्णु, शिव और यमराज एक साथ इस कमरे में आएंगे तब तोते की जान उड जाएगी।”

यही है किस्मत ।।

मसखरी

10 साल के बाद एक औरत को अपने बेटे की बर्ताव पर शक आई। तो उसने DNA टेस्ट करवाली।

नतीजा यह निकला कि बेटे के माँ, बाप और कोई हैं।

वह अपनी पति से यह बात बोली।

औरत ः जी, जरा सुनिए तो। बहुत ही खास बात है, हमारा बेटा हमारा नहीं है। यह बात DNA टेस्ट में साबित हो गई।

पति ः अरी तुम्हें याद है, जब बेटा पैदा हुआ था, हास्पिटल से निकलते समय नेप्किन् गंदा कर दिया था। तो तू ने मुझे अंदर जाकर इस गंदे लडके को बदलकर आने को कही और तू कारिडोर में इंतजार कर रही थी।

मैं अंदर गया हमारे बच्चे को छोड़कर एक साफ बच्चे को वापस लाया।

नीति ः कभी भी नाकाबिल लोगों पर भरोसा रखेंगे तो उसका परिणाम भुगना पडेगा।

सनडे स्पेशल

कल मेरी बेटी की दोस्त लंच के लिए हमारे घर आए थे।

एक सिक्किम से और एक केरल से।

केरल का लडका उत्तर प्रदेश में कुछ साल पढा था इसलिए उसे हिन्दी में बात करने में कोई तकलीफ़ नहीं थी।

जब हम तीनों की बातचीत हिन्दी में चल रही थी , धीरे धीरे मेरी बेटी भी हिन्दी में बात करने लगी।

इस बात पर मुझे बेहद खुशी हुई कि , मैं उसकी कलीग्स के साथ मेरी बेटी से हिन्दी में ही बात करने की विनती की।

पारंपरिक दक्षिण भारत की दावत उन्हें भी पसंद हुई, जिससे मैं बिलकुल खुश हूँ।

सेलम् की सफर

मेरी बेटी सेलम् में भारत पेट्रोलियम में काम करती है।

सेल्स में काम करने के नाते उसे खाने या सोने का फुरसत ही नहीं मिलती।

सदा काम में जुटी रहती।

इस बात को लेकर मैं तो परेशान हो जाती।

इसलिए मैं उसे मदद करने चेन्नै से आई हूँ।

बेचारी यदि मैं नहीं हूँ तो अकेले अपने आप को सँभालने में कितनी कष्ट लेनी पडेगी।

फिर भी उसे किसी की सहारे के बिना अपना काम स्वयं करने में थोड़ी सी प्रशिक्षण देनी है।कोशिश करूँगी।😊

हिन्दुस्तानी का हालत

मेरा बेटा जर्मनी देश में काम करता है।

एक रविवार को उसने एक बंग्लादेशीय रेस्टोरेंट में वेजिटबिल पकोडे 10 यूरोस् देकर होम डेलिवरी की आर्डर किया था।

जब पकोडे घर पहूँची तो मेरे बेटे ने खाने के लिए खोला तो भीतर की सब्जियां बिलकुल खराब थी और पकोडे भी अध पकी। 

बेचारा क्या कर सकता। उन्हें फेंकना पडा।

मेरा तो सिर्फ एक ही सवाल है क्या यही बंग्लादेशी जर्मन को ऐसी खराब हुई खाना दे सकता??

हम हिन्दुस्तानी जहाँ भी हो हमसे भी छोटे देश के लोग भी हमारी बेइज्जती आसानी से करते हैं।

लेकिन ऐसा क्यों???

 रामकृष्ण परमहंस औऱ स्वामी विवेकानन्द के बीच की संभाषण।

विवेकानंद ःः  मेरे पास वक्त ही नहीं, जिंदगी में सदा केलिए दौड रहा हूँ मैं।

रामकृष्ण ःः कार्य कलाप तुझे जुटे रखती तो उत्पादकता तुझे आराम देती।

विवेकानंद ःः जिंदगी क्यों मुश्किलों से भरी है ?

रामकृष्ण ःः इसका विश्लेषण छोड़ और जिंदगी को जियो।

विवेकानंद ःः जीवन क्यों दुःख मय होती है?

रामकृष्ण ःः इसे दुःखमयी समझना तुम्हारा आदत पड गया, जैसे विचार वैसे नजर।

विवेकानंद ःः अच्छे लोगों को क्यों कठिनाइयों का सामना करना पडता है?

रामकृष्ण ःः जैसे कि हीरे को रगडे बिना न चमकती, सोने को आग में डाल कर साफ की जाती, अच्छे लोगों को भी कठिनाइयों का सामना करके औऱ भी बेहतर बन सकते।

विवेकानंद ःः क्या जिंदगी में ऐसा अनुभव अनिवार्य ह?

रामकृष्ण ःः अनुभव एक अच्छी आचार्या है, जो पहले कठिन परीक्षा रखती औऱ बाद में अनुभव का उपहार देती।

विवेकानंद ःः ढेर सारे परेशानियों की वजह से यह पता नहीं चल रहा है कि, हमारी मंजिल कहाँ?

रामकृष्ण ःः तुम बाहरी दुनिया को देखोगे तो तुम्हें सब कुछ ऐसे ही नजराती। यदि तुम अपनी ही भीतर देखोगे तो, तेरी आँखें तुम्हें नजर देती और तेरे दिल तुझे राह दिखाती।

विवेकानंद ःः यदि हम सही रास्ते पर चलते समय हमें किसी भी तरह की ठेस पहूँचती तो वह कोई असफलता है?

रामकृष्ण ःः विजय औरों से निश्चित किया जाता है,  लेकिन हमारी संतोष हम निश्चित करते हैं।

विवेकानंद ःः कठिनाइयों के समय आपको चेतना कैसे मिलती है?

रामकृष्ण ःः कदापि ऐसे सोचो कि तुम यहाँ तक कैसे पहूँचा, न कि अनुपस्थित को।

विवेकानंद ःः आप को लोगों की कौन सी मनोभावना पर आश्चर्य होती है?

रामकृष्ण ःः संकटों के समय चिंतित होकर कहते हैं सिर्फ मुझे क्यों ऐसा!! लेकिन जब अच्छी स्थिति में होते तो ऐसे नहीं कहते!!!

विवेकानंद ःः जिंदगी में सफलता पाने के लिए मुझे क्या करना चाहिए?

रामकृष्ण ःः भूतकाल को पछताओ। वर्तमान को आत्मविश्वास से संभालो। भविष्य को निडर होकर सामना करो।

विवेकानंद ःः कभी कभी मुझे ऐसा लगता है कि मेरे प्रार्थनाओं का जवाब नहीं मिल रहा है।

रामकृष्ण ःः अनुत्तरित प्रार्थनाएँ असंभव है। भरोसा रखो। निडर रहो। जिंदगी एक अद्भुत चीज़ है , इसे जी भर के जियो।

सर्दार ःः आप पढे, लिखे हैं?

लडका ःः जी हाँ, B.A. तक

सर्दारःः दो अक्षर वह भी उल्टे। बाप रे। 

पहला ःः दस रुपये हो तो दो न ।

दूसरा ःः बिल्कुल नहीं।

पहला ःःःः दो गे तो मैं बिलकुल कर दूँगा।

पहला ःः तेरे पांव में यह घाव कैसे हुई?

दूसरा ःः नये जूते काटी।

पहला ःः तो क्य जूतों को ऐसे दबाओगे तो वे चुप रहेंगे क्या??

पोता ःः दादाजी आजकल कम्प्यूटर पढने से ही काम मिलेगी।

दादाजी ःः तो क्य, तुम पढोगे तो काम नहीं मिलेगी🙄 

हे भगवान यह कैसा जमाना है रे ।