परिपक्वता

१)   परिपक्वता वह है , जो औरों में बदलाव लाने की कोशिश को छोड़कर अपने आप को बदलने की कोशिश करें।

२)  लोगों को उनके अपने ही गुणों से स्वीकार करने को परिपक्वता कहते हैं।

३)  जब हम औरों को उनके नजरों से देखकर समझने की कोशिश करें तो हमें किसी पर भी ग़लत फहमी नहीं हो सकती है।

४)   जब हम अपेक्षा करने को छोड़कर मददगार को अपनाएं वहीं परिपक्वता होती है।

५)   हमारे सोच ऐसे हों कि, हम जो कुछ भी कर रहे हैं, सिर्फ अपने मन की शांति के लिए ही कर रहे हैं।

६)   सबको अपने अक्लमंदीपन  दिखलाने की कोशिश को छोड़ें।

७)   अपने को दूसरों के अनुमोदन के लिए तरसना छोड़ दें।

८)   अपने को औरों से तुलना करके परेशान होना त्याग करें।

९)   जरूरती और इच्छाओं के बीच के अंतर को समझें।

१०)   सबसे ज्यादा खुशी से रहने के लिए पदार्थवादी चीजों पर होनेवाली आशाओं को त्याग करें।

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