कोरोना वैरस / एहतियात।

कोरोना वैरस परिमाण में थोड़ा सा बडा आकृति का होता है। करीब 400-500 मैक्रान्स । इसलिए इस कीटाणु से बचने के लिए साधारण साफ कपडे का मुखौटा ही काफी होगा। यदि बाजार में खास नाम पर इस वैरस को रोकने का मुखौटा बिकें तो इस पर धोखा मत खाइए।

कोरोना वैरस हवा के द्वारा फैलने वाले कीटाणु नहीं बल्कि यह स्पर्श से फैलने वाले कीटाणु हैं।

यह वैरस लोहों पर 12घंटों तक जीवित रह सकते हैं, इसलिए किसी भी चीज को छूने के बाद साबुन से तुरंत हाथों को साफ करें।

कोरोना वैरस कपडों पर 9 घंटे तक सजीव रह सकते हैं, इसलिए कपडों को 2घंटे तक सूरज के प्रकाश में सुखाना बेहतर होगा।

यह वैरस 26० – 27० शीतोष्ण स्थिति में जीवित रह सकते हैं। भारत जैसा उष्णकटिबंधीय देश में इसका फैलाव थोड़ा कठिन होगा, फिर भी हमें इससे सुरक्षित रखने के लिए रोज सूरज की रोशनी में कुछ देर तक रहें और गरम पानी पिएँ। ऐसक्रीम जैसे ठंडे चीजों को वर्जन करें।

गले का सूखापन इस वैरस का आरंभिक सूचना है, इसलिए गरम पानी में नमक मिलाकर अक्सर गलगला करें ताकि यह वैरस को जिगर तक फैलने से रोक सकें।

ऊपर दिएहुए सूचनाएँ कोरोना वैरस से सुरक्षित रहने के लिए UNICEF द्वारा प्रस्तुत की गई है।

It is a great privilege to witness the present life of Siddhar (Yogi) who went into Jeeva Samadhi 300 years ago in Valliyur in Tamilnadu.

He was found alive while digging the mud to renovate the Valliyoor temple. Siddhar is seen sitting in Yogasana.
an incredible India which rest of world cannot imagine🙏

कालडी

जय जय शंकर। हर हर शंकर।🙏🙏

पूज्य श्री शंकराचार्य श्री चंद्रशेखर सरस्वती स्वामी जी से मिलने के लिए एक भूवैज्ञानिक आए थे। स्वामी जी उनसे केरला में बहनेवाली पेरियार ( पूर्णानदी) से बालू वैसे ही कालडी की तरफ यू टर्न लेकर प्रवाह होने की जगह से बालू को लेकर अलग अलग शोधन करके उन दोनों के काल समय की जानकारी देने की आग्रह किए।

पेरियार नदी का आयु 10,000 साल पुरानी की थी, लेकिन वह नदी जहाँ यूटर्न लेकर आदि शंकराचार्य के घर तक बहती है, जो अब भी कालडी में उपलब्ध है, वहाँ की रेत की आयु 2,500 वर्ष पुरानी थी।

आदि शंकराचार्य स्वामी जी की माता प्रतिदिन सुबह उठकर पूर्णानदी तक पैदल चलकर स्नान करती थी। लेकिन बुढापे के कारण वहाँ तक प्रतिदिन जाना उन्हें मुश्किल लग रहा था। शंकराचार्य जी के मना करने पर भी वे उनकी बात न मानी और परिश्रम से नदी तक जा रही थी। शंकराचार्य स्वामी ने नदी माता से अपनी माँ के लिए अपने घर तक बहने की प्रार्थना की। और अगले दिन से पूर्णानदी अपनी सहज गति से मुडकर शंकराचार्य स्वामी के घर तक बहना शुरू की। अब भी हमें इसे देखने को मिलता है।

कालडी का मतलब है, तमिल भाषा में पैरों के नीचे। माने पूर्णानदी आचार्य जी के माता की सुविधा के लिए उनके पैरों तक बहने के कारण से यह कालडी नामकरण सिद्ध हुई।

Best Era Ever

Born in 60’s. Grew up in 70’s. Educated in 80’s. Ventured in 90’s. Made it to ….2020

We have lived in…..Five different decades…Two different centuries….Two different millennia.

We have been through Biascope to YouTube, Gramophone to iPod, Letters to Mobile phone.. And many more…..

Typically we can be termed as xennials….A cross over generation of people whose birth years are in between mid of 1960s and early 1970s… Having an ANALOG of childhood and Digital Adulthood.

Literally our generation has lived through and witnessed all in every dimension of life….. ours is the generation who has given a new paradigm to the word CHANGE.

Let’s thank life for everything….

Surely we will cross over the 20s and cross over the 30s with fun and frolic.

Wishing everyone a great decade ahead.

ताजा। खबर। 💐

मैं आप सभी को यह बात बताना चाहती हूँ कि, हमारे प्यारे जाने-पहचाने महोदय श्री 2019 आज के बाद संपूर्ण विराम लेनेवाले हैं।

उनके 12 बीवियाँ, 52बच्चे और 365पोते-पोतियाँ इनके विराम के माहौल पर हाजिर होकर मुझसे आपके साथ कुछ बातें बताने की विनती की हैं। वे विराम के साथ आप सबके परेशानियाँ, बीमारियाँ,अकालमृत्यु,बेइज्जती,तिरस्कार, अपमान, निंदा,असफलता , निरुत्साह सबको ले जा रहे हैं।

इस जगह उनके वारिस श्रीमान 2020 आप सबको शांति, दीर्घायु, तन्दुरूस्त,सम्मान,शान, सफलता, संपत्ति,प्रोत्साह,उन्नति से आपके जीवन को भरना चाहते हैं।

आप सभी को नूतन वर्ष की शुभकामनाएँ।

💐🎂🌹🎆

स्वार्थ तथा परोपकार

आजकल के ज्यादातर लोगों में स्वार्थता बहुत ही बढ ग ई है। दूसरों को मदद करने के लिए जितना भी मौका क्यों न हो, इस में इनका सोच” अपने को क्या फायदा मिलें!” जैसे ही होती है।

एक समय एक लडके को कडी बुखार हुई।वह बिस्तर से उठ नहीं पा रहा था। डाक्टर को बुलवाए। डाक्टर इस लडके को जांच किया और कहा कि , इसको रोग फैलाने वाले कीटाणू के कारण यह बुखार हुई है और इस कारण उसे बाहर कहीं नहीं जाना चाहिए। हर दिन डाक्टर उनके घर जाकर इलाज किया। दवाइयाँ, गोलियाँ और इनजेक्शन भी लगाया। एक हफ्ते के बाद लडका ठीक हो गया। डाक्टर ने इतने दिनों के इलाज की बिल दिया। इसे देखकर बेटे का बाप ने चिल्लाने लगा और कहा, ” मैं क्यों आपको पैसे दूँ?” डाक्टर धीरे से कहा, ” मैं एक हफ्ते तक आपके घर आकर इलाज किया हूँ। दवाइयाँ, गोलियाँ और इन्जेक्शन भी लगाया हूँ। इसलिए !”

इसपर लडके के बाप ने कहा, “मेरे बेटे की वजह से ही बीमार फैली है और आपके यहाँ इलाज के लिए ढेर सारे लोग आ रहे हैं, जिससे आपके आमदनी बढेगी। सच कहूँ तो आपको ही को मुझे पैसे देना चाहिए। ”

इस तरह लोगों में हरेक विषय पर सिर्फ और सिर्फ अपने स्वार्थता की चिंतना ही बढ रही है। जीहाँ दोस्तो, परोपकारता बांसुरी जैस होताा है और स्वार्थ फुटबाल जैसा। दोनों हवा से चलता है। एक को तो चूमा जाता है और दूसरे को धक्का मारा जाता है।

बांसुरी हवा को बाहर भेजकर सुंदर संगीत से सबको सम्मोहित करती है, जहाँ कि फुटबाल हवा को अपने अदर रखकर सबसे धक्का खाती है।

बांसुरी जैसा परोपकारी सबका पसंदित होता है, फुटबाल जैसा स्वार्थी सबसे तिरस्कृत किया जाता है।🌹